पाकुड़। जिले के हजारों छात्र-छात्राओं के उच्च शिक्षा के भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर छात्र संगठन ने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका में आंदोलन शुरू कर दिया है। केकेएम कॉलेज, पाकुड़ में स्नातक स्तर पर सीटों में की गई भारी कटौती के विरोध में एनएसयू के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं का शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्रों का कहना है कि सीटों में इतनी बड़ी कटौती से पाकुड़ और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर सीमित होने का खतरा पैदा हो गया है।
एनएसयू अध्यक्ष शाहजमल शेख के नेतृत्व में छात्र संगठन विश्वविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहा है। संगठन का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर विश्वविद्यालय प्रशासन को सकारात्मक और शीघ्र पहल करनी चाहिए तथा सीटों में की गई कटौती पर पुनर्विचार करते हुए पूर्व की व्यवस्था के अनुरूप पर्याप्त सीटें उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
4650 से घटाकर लगभग 1800 कर दी गई सीटें
छात्र संगठन के अनुसार, केकेएम कॉलेज, पाकुड़ में पहले लगभग 4650 सीटें उपलब्ध थीं। अब इन सीटों को घटाकर लगभग 1800 कर दिया गया है। यानी छात्रों के अनुसार लगभग 2850 सीटों की कमी हो गई है।
छात्र संगठन का कहना है कि सीटों में इतनी बड़ी कटौती केवल कॉलेज की संख्या में कमी का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उन हजारों विद्यार्थियों पर पड़ सकता है जो इंटरमीडिएट के बाद स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए स्थानीय कॉलेजों में दाखिला लेना चाहते हैं।
पाकुड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए केकेएम कॉलेज जैसे स्थानीय संस्थानों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उपलब्ध सीटों में भारी कमी होने से कई विद्यार्थियों को दाखिले के लिए दूसरे शहरों या अन्य संस्थानों का रुख करना पड़ सकता है।
छात्रों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
छात्र संगठन का कहना है कि उच्च शिक्षा का अवसर प्रत्येक विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा बेहद जरूरी है।
यदि स्थानीय कॉलेज में पर्याप्त सीटें उपलब्ध नहीं होंगी, तो विद्यार्थियों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। दूसरे शहरों में पढ़ाई के लिए जाने पर उन्हें अतिरिक्त आवास, भोजन, यात्रा और अन्य खर्च उठाने पड़ सकते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च उच्च शिक्षा की राह में बड़ी बाधा बन सकता है।
इसी कारण छात्र संगठन सीटों में की गई कटौती को विद्यार्थियों के हित में गंभीर विषय मान रहा है।
5 अगस्त से लगातार जारी है धरना-प्रदर्शन
केकेएम कॉलेज की सीटों में कटौती के विरोध में छात्र-छात्राओं का 5 अगस्त 2026 से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है।
छात्र संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की समस्या को उचित मंच तक पहुंचाना और उसका समाधान सुनिश्चित कराना है। संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रख रहा है।
धरने के माध्यम से छात्र यह मांग उठा रहे हैं कि सीटों में हुई कटौती के कारणों की समीक्षा की जाए और विद्यार्थियों के हित में उचित निर्णय लिया जाए।
विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्रों ने उठाई आवाज
एनएसयू अध्यक्ष शाहजमल शेख के नेतृत्व में छात्र संगठन के प्रतिनिधि सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका पहुंचे और वहां धरना-प्रदर्शन शुरू किया। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
छात्र संगठन का जोर इस बात पर है कि समस्या का समाधान बातचीत और सकारात्मक निर्णय के माध्यम से निकाला जाए।
उनका कहना है कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस विषय को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक प्रभाव को भी समझना जरूरी है।
ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है KKM कॉलेज?
पाकुड़ जिले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इनमें ऐसे विद्यार्थी भी शामिल हैं जिनके परिवार आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों में अपने बच्चों को पढ़ाने का प्रयास करते हैं।
ऐसे विद्यार्थियों के लिए अपने जिले में ही स्नातक की पढ़ाई का अवसर मिलना काफी महत्वपूर्ण है। स्थानीय कॉलेज में दाखिला मिलने से उन्हें बाहर जाकर रहने और पढ़ाई करने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से राहत मिलती है।
छात्र संगठन का तर्क है कि सीटों में भारी कमी का असर ऐसे ही विद्यार्थियों पर सबसे अधिक पड़ सकता है। यदि पर्याप्त सीटें उपलब्ध नहीं होंगी तो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को दाखिले से वंचित होने की आशंका रहेगी या उन्हें दूसरे संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रयास करना पड़ेगा।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से की पुनर्विचार की मांग
एनएसयू ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि केकेएम कॉलेज में सीटों की संख्या को लेकर गंभीरता से विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि पूर्व में जहां लगभग 4650 सीटें उपलब्ध थीं, वहां अब लगभग 1800 सीटों का रह जाना विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय है।
छात्र संगठन चाहता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सीटों में कटौती के कारणों की समीक्षा करे और विद्यार्थियों की संख्या तथा क्षेत्र की शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त सीटें उपलब्ध कराने का प्रयास करे।
संगठन का कहना है कि किसी भी विद्यार्थी को केवल सीटों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए।
शाहजमल शेख बोले—छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है संगठन
एनएसयू अध्यक्ष शाहजमल शेख ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर संगठन पूरी मजबूती के साथ छात्र-छात्राओं के साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की जायज मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष लगातार उठाया जाएगा। संगठन का उद्देश्य छात्रों को उनका शैक्षणिक अधिकार दिलाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करना है।
शाहजमल शेख के अनुसार, यदि सीटों की संख्या कम होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थी दाखिले से वंचित होते हैं तो यह उनके भविष्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए।
आंदोलन के पीछे सिर्फ सीटों का सवाल नहीं, भविष्य की चिंता
छात्र संगठन का कहना है कि मौजूदा आंदोलन केवल सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर की चिंता जुड़ी हुई है।
छात्रों के अनुसार, किसी भी जिले में उच्च शिक्षा के संस्थानों में पर्याप्त सीटें होना जरूरी है, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल सके।
यदि कॉलेज की उपलब्ध सीटें विद्यार्थियों की मांग की तुलना में काफी कम हो जाती हैं तो इसका असर नामांकन प्रक्रिया पर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में छात्र संगठन पहले से ही इस मुद्दे को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने प्रमुखता से उठा रहा है।
शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए समाधान की उम्मीद
छात्र संगठन ने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने की बात कही है। संगठन की कोशिश है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान निकले।
छात्रों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से सुनेगा और केकेएम कॉलेज की सीटों में हुई भारी कटौती को लेकर उचित निर्णय लेगा।
वहीं, आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि शिक्षा के अवसरों को सुरक्षित रखने के लिए अपनी आवाज उठाना है।
हजारों विद्यार्थियों की नजर अब विश्वविद्यालय के फैसले पर
केकेएम कॉलेज की सीटों में भारी कटौती के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन के बाद अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर है।
एक तरफ छात्र संगठन सीटों को पूर्व की स्थिति के अनुरूप पर्याप्त करने की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर यह मामला पाकुड़ जिले में उच्च शिक्षा के अवसरों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
छात्र संगठन का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेता है तो इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल 5 अगस्त से शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है और एनएसयू अध्यक्ष शाहजमल शेख के नेतृत्व में छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में डटा हुआ है।
अब देखना यह होगा कि 4650 से घटकर लगभग 1800 हुई सीटों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या निर्णय लेता है और पाकुड़ के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे का समाधान किस दिशा में निकलता है।


