मुंबई/रांची। हर बड़ा बदलाव हमेशा किसी बड़े फैसले से शुरू हो, यह जरूरी नहीं। कई बार बदलाव की शुरुआत एक छोटे से कदम से होती है। लेकिन जब वही छोटा कदम किसी बच्चे के हाथ में शिक्षा का साधन बन जाए, किसी महिला के भीतर आत्मविश्वास पैदा करे और किसी जरूरतमंद परिवार के जीवन में उम्मीद की किरण लेकर आए, तो उसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे पूरे समाज तक पहुंच सकता है।
भारतीय सिनेमा, फैशन और उद्यमिता की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली और झारखंड की बेटी शिवानी शर्मा ने अब सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत की है। मुंबई में 9 अगस्त को शिवानी शर्मा ने आधिकारिक रूप से ShivaniSharma Foundation की शुरुआत की। फाउंडेशन का मूल मंत्र रखा गया है—“छोटा कदम, बड़ा प्रभाव”।
इस पहल के जरिए शिवानी शर्मा ने अपनी पहचान और अनुभव को समाज के उन वर्गों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है, जिन्हें अवसर, संसाधन और सहयोग की सबसे अधिक जरूरत है। फाउंडेशन का मुख्य फोकस बच्चों एवं महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, ग्रामीण विकास, मानवीय सहायता, पर्यावरण और सामुदायिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में काम करना है।
लॉन्च के साथ ही 50 बच्चों को मिला डिजिटल शिक्षा का सहारा
ShivaniSharma Foundation की शुरुआत केवल भाषणों और औपचारिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रही। लॉन्च कार्यक्रम के दौरान 50 बच्चों को लैपटॉप और स्पोर्ट्सवियर वितरित किए गए।
लैपटॉप वितरण इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। आज के दौर में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किताबों और कक्षाओं के साथ-साथ डिजिटल संसाधन भी विद्यार्थियों के सीखने और आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।
ऐसे में किसी बच्चे के हाथ में लैपटॉप पहुंचना केवल एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस उपलब्ध कराना नहीं है। यह उसके लिए डिजिटल दुनिया से जुड़ने, नई चीजें सीखने, जानकारी हासिल करने, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने और भविष्य के नए अवसरों तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकता है।
फाउंडेशन का प्रयास इसी सोच के साथ बच्चों को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी संसाधनों से जोड़ने का है।
एक लैपटॉप, कई सपनों की शुरुआत
आज का दौर डिजिटल शिक्षा और तकनीकी ज्ञान का दौर है। इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सीखने के अवसरों को पहले से कहीं अधिक व्यापक बनाया है। लेकिन हर बच्चे के पास कंप्यूटर या लैपटॉप जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
ऐसे में जरूरतमंद बच्चों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने की पहल उनके लिए शिक्षा के नए दरवाजे खोल सकती है।
एक लैपटॉप के जरिए कोई बच्चा नई भाषा सीख सकता है, ऑनलाइन पाठ्यक्रम कर सकता है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकता है, तकनीकी कौशल विकसित कर सकता है या अपनी रुचि के किसी क्षेत्र में नई जानकारी हासिल कर सकता है।
इसीलिए फाउंडेशन की शुरुआती पहल को केवल वस्तु वितरण के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों को अवसर देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण पर रहेगा विशेष जोर
ShivaniSharma Foundation ने अपने काम के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें बाल सशक्तीकरण और महिला सशक्तीकरण प्रमुख हैं।
शिवानी शर्मा का मानना है कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा मिले तथा महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और आत्मनिर्भर बनने के पर्याप्त अवसर प्राप्त हों।
फाउंडेशन महिलाओं को उनके अधिकारों और क्षमताओं के प्रति जागरूक करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी काम करने की तैयारी कर रहा है।
उनका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियां बनाने में सहयोग करना है, जहां महिलाएं अपने निर्णय खुद लेने में सक्षम हों और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ सकें।
शिक्षा से स्वास्थ्य तक कई क्षेत्रों में काम करेगा फाउंडेशन
ShivaniSharma Foundation ने अपने सामाजिक कार्यों के लिए कई क्षेत्रों को शामिल किया है। फाउंडेशन के कार्यक्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल सशक्तीकरण, खेल के माध्यम से विकास, ग्रामीण परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, शहरी नवीनीकरण, कला, संस्कृति एवं विरासत, पर्यावरण और पशु कल्याण जैसे विषय शामिल हैं।
इससे साफ है कि संस्था की योजना केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों को समझते हुए अलग-अलग स्तर पर काम करना है।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘छोटा कदम, बड़ा प्रभाव’ बना फाउंडेशन का मूल मंत्र
फाउंडेशन की पूरी सोच उसके मूल मंत्र “छोटा कदम, बड़ा प्रभाव” में दिखाई देती है।
इसका संदेश यह है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा किसी बहुत बड़े संसाधन या बड़े अभियान की आवश्यकता नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार एक छोटा कदम उठाता है और वह कदम किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है, तो उसका प्रभाव धीरे-धीरे व्यापक हो सकता है।
किसी बच्चे को पढ़ाई के लिए लैपटॉप देना, किसी महिला को आत्मनिर्भर बनने के लिए कौशल उपलब्ध कराना या किसी जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में सहायता देना—ये छोटे प्रयास भविष्य में बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं।
शिवानी शर्मा ने सफलता की दिखाई नई परिभाषा
आज की दुनिया में सफलता को अक्सर नाम, पैसा, प्रसिद्धि और व्यक्तिगत उपलब्धियों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन शिवानी शर्मा ने अपने सामाजिक अभियान के जरिए सफलता की एक अलग तस्वीर सामने रखने की कोशिश की है।
उनका संदेश है कि यदि किसी की पहचान और संसाधनों का उपयोग समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए किया जाए, तो सफलता का अर्थ और भी व्यापक हो जाता है।
किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी लड़की को उसके सपने पूरे करने के लिए हिम्मत देना, किसी महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना या किसी युवा को अपने भविष्य के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण रूप हो सकता है।
मुंबई में जुटे सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग
मुंबई में आयोजित फाउंडेशन के लॉन्च कार्यक्रम में सामाजिक क्षेत्र, राजनीति, उद्यमिता और सामुदायिक नेतृत्व से जुड़े कई लोगों की मौजूदगी रही।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर, सांसद संजय दीना पाटिल, माहिम दरगाह और हाजी अली दरगाह के मैनेजमेंट ट्रस्टी सुहैल खंडवानी, OOJ फाउंडेशन के संस्थापक योगी प्रियव्रत अनीमेष, समाजसेवक रत्ना भूषण, युवा नेता एवं उद्यमी अमित तिवारी, पूर्व BMC कॉर्पोरेटर सुनील अहीर, सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट की ट्रस्टी मनीषा तुपे और मैत्री फाउंडेशन की संस्थापक ऐश्वर्या संगीता सचिन अहीर समेत कई लोग मौजूद रहे।
इनकी मौजूदगी ने लॉन्च कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक समर्थन और पहचान दी।
झारखंड की बेटी के लिए रांची सिर्फ अगला पड़ाव नहीं
मुंबई में फाउंडेशन की शुरुआत के बाद अब इसकी नजर झारखंड पर है। फाउंडेशन का अगला महत्वपूर्ण कार्यक्रम रांची में आयोजित किए जाने की तैयारी है।
आयोजकों के अनुसार, रांची में होने वाले कार्यक्रम में 500 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम के जरिए फाउंडेशन की गतिविधियों को झारखंड तक विस्तार देने की योजना है।
शिवानी शर्मा के लिए रांची का कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह झारखंड से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अपने राज्य में सामाजिक पहल का विस्तार करना उनके लिए केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और अपने राज्य के लोगों के लिए काम करने की भावना से जुड़ा कदम है।
झारखंड में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर उम्मीदें
झारखंड के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, डिजिटल संसाधन, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं। ऐसे में सामाजिक संस्थाओं की पहल इन क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान दे सकती है।
रांची से फाउंडेशन के काम को आगे बढ़ाने के बाद भविष्य में राज्य के अन्य क्षेत्रों तक इसकी पहुंच बढ़ने की संभावना है।
विशेष रूप से बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल झारखंड जैसे राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि फाउंडेशन की गतिविधियों का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में उसके कार्यक्रमों के विस्तार और निरंतरता से सामने आएगा, लेकिन शुरुआती चरण में 50 बच्चों को लैपटॉप देना इसके उद्देश्य की दिशा में एक स्पष्ट कदम जरूर है।
हर लड़की अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखे—शिवानी शर्मा
शिवानी शर्मा का कहना है कि वह चाहती हैं कि हर लड़की अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखे, हर महिला अपनी क्षमता और अधिकारों को पहचाने और हर बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
उनकी इस सोच में महिला और बाल सशक्तीकरण को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार माना गया है।
उनका प्रयास है कि फाउंडेशन केवल सहायता प्रदान करने वाली संस्था न बने, बल्कि लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए आवश्यक अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करे।
खेल को भी बनाया गया विकास का माध्यम
फाउंडेशन के कार्यक्षेत्र में खेल के माध्यम से विकास को भी शामिल किया गया है। खेल बच्चों और युवाओं के शारीरिक विकास के साथ-साथ अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लॉन्च कार्यक्रम में बच्चों को स्पोर्ट्सवियर का वितरण इसी व्यापक सोच से जुड़ा हुआ माना जा सकता है।
खेल प्रतिभाओं को उचित संसाधन और प्रोत्साहन मिलना विशेष रूप से उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
ग्रामीण विकास और पर्यावरण पर भी रहेगा ध्यान
फाउंडेशन के कार्यक्षेत्र में ग्रामीण परिवर्तन, पर्यावरण और पशु कल्याण को शामिल किया जाना इसकी व्यापक सामाजिक सोच को दर्शाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सामुदायिक विकास से जुड़ी योजनाएं स्थानीय स्तर पर लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती हैं।
इसी तरह पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण जैसे विषयों पर काम करना भी सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फाउंडेशन की योजना इन विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रम विकसित करने की है।
आपदा के समय सहायता पहुंचाने की तैयारी
फाउंडेशन ने आपदा प्रबंधन को भी अपने प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल किया है। प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात परिस्थितियों में प्रभावित लोगों तक भोजन, आवश्यक सामग्री और सहायता पहुंचाना मानवीय सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यदि भविष्य में फाउंडेशन इस क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से काम करता है तो आपदा प्रभावित समुदायों तक समय पर सहायता पहुंचाने में योगदान दिया जा सकता है।
कला, संस्कृति और विरासत को भी मिलेगी जगह
समाज सेवा के साथ-साथ फाउंडेशन ने कला, संस्कृति और विरासत को भी अपने कार्यक्षेत्र में शामिल किया है।
भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय परंपराओं को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी भविष्य में पहल की संभावनाएं बन सकती हैं।
रांची कार्यक्रम को लेकर बढ़ी उत्सुकता
मुंबई में सफल शुरुआत के बाद अब रांची में होने वाले कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है। 500 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावित संख्या यह संकेत देती है कि फाउंडेशन अपने गृह राज्य में भी व्यापक स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
झारखंड से जुड़ी अपनी पहचान के कारण शिवानी शर्मा के लिए रांची का कार्यक्रम भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण होगा।
मुंबई से शुरू हुआ अभियान जब झारखंड पहुंचेगा तो यह देखना दिलचस्प होगा कि फाउंडेशन राज्य में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है और किस तरह के सामाजिक कार्यक्रमों को जमीन पर उतारा जाता है।
एक छोटे कदम से बड़े बदलाव की उम्मीद
ShivaniSharma Foundation की शुरुआत भले ही एक छोटे कदम के रूप में हुई हो, लेकिन इसकी सोच काफी व्यापक है।
मुंबई में 50 बच्चों को लैपटॉप देना इस यात्रा की शुरुआती तस्वीर है। आगे यदि यही प्रयास हजारों बच्चों को शिक्षा, सैकड़ों महिलाओं को कौशल और आत्मनिर्भरता तथा जरूरतमंद परिवारों को सहायता से जोड़ता है, तो इसका सामाजिक प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फाउंडेशन ने अपने अभियान में अवसर और सशक्तिकरण को केंद्र में रखा है। केवल मदद देने के बजाय लोगों को आगे बढ़ने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना लंबे समय में अधिक प्रभावी बदलाव ला सकता है।
अब मुंबई के बाद रांची की बारी
मुंबई में 9 अगस्त को शुरू हुआ यह सामाजिक अभियान अब झारखंड की ओर बढ़ रहा है। एक ओर 50 बच्चों के हाथ में लैपटॉप पहुंचाकर डिजिटल शिक्षा की दिशा में कदम उठाया गया है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं, बच्चों, युवाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प सामने आया है।
अब सबकी नजर रांची में होने वाले आगामी कार्यक्रम पर है। वहां से फाउंडेशन किस तरह अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाता है और झारखंड के कितने लोगों तक पहुंच बनाता है, यह आने वाला समय बताएगा।
लेकिन एक बात साफ है—शिवानी शर्मा ने अपनी पहचान को सिर्फ व्यक्तिगत सफलता तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक बदलाव के माध्यम में बदलने की कोशिश शुरू कर दी है।
50 बच्चों के हाथ में पहुंचे लैपटॉप इस यात्रा की शुरुआत हैं। अगर इन लैपटॉप से किसी बच्चे का सपना आकार लेता है, किसी युवा को नया कौशल मिलता है, किसी महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है और किसी परिवार के जीवन में उम्मीद लौटती है, तो यही ‘छोटा कदम’ आने वाले समय में वास्तव में ‘बड़ा प्रभाव’ पैदा कर सकता है।


