पाकुड़। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद स्टेडियम के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इसी घटना के विरोध में जिला कांग्रेस कमिटी, पाकुड़ ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए इसे जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक विभाजन की मानसिकता से जोड़कर कड़ी आपत्ति जताई।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देशनुसार जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कांग्रेस कार्यालय से मार्च करते हुए डॉ. बी.आर. अंबेडकर चौक पहुंचे। यहां बाबा साहेब की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेसजनों ने सत्याग्रह किया और कथित शुद्धिकरण की घटना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और घटना की कड़ी निंदा करते हुए सामाजिक समानता एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।
‘किसी इंसान की मौजूदगी से जगह अशुद्ध कैसे?’
सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किसी व्यक्ति की मौजूदगी के बाद किसी सार्वजनिक स्थान का ‘शुद्धिकरण’ करने की जरूरत क्यों पड़ती है? नेताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति के वहां जाने या कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सार्वजनिक स्थान को ‘शुद्ध’ करने जैसी मानसिकता समाज में जातिगत भेदभाव और छुआछूत की सोच को बढ़ावा देती है।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता है। ऐसे में किसी व्यक्ति की सामाजिक या जातिगत पहचान के आधार पर उसके साथ भेदभाव किया जाना संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थान किसी एक व्यक्ति या वर्ग के नहीं होते, बल्कि वे समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए समान रूप से होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की मौजूदगी के बाद किसी स्थान को ‘अशुद्ध’ मानना सामाजिक समानता के विचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अंबेडकर चौक पर संविधान की दुहाई
कांग्रेस ने अपना सत्याग्रह डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष आयोजित कर इस विरोध को संविधान और सामाजिक न्याय के मुद्दे से जोड़ा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संवैधानिक व्यवस्था में हर नागरिक को समान अधिकार, सम्मान और गरिमा प्राप्त है। संविधान जाति, धर्म, भाषा या किसी अन्य पहचान के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता।
उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब समाज में समानता, भाईचारा और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो।
कांग्रेस बोली—सामाजिक विभाजन की मानसिकता का विरोध जरूरी
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति की मौजूदगी के बाद सार्वजनिक स्थान के ‘शुद्धिकरण’ की घटना को सामान्य घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। ऐसी घटनाएं समाज में भेदभाव और छुआछूत जैसी पुरानी मानसिकताओं को मजबूत कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार और समानता के लंबे संघर्ष के बावजूद यदि इस तरह की मानसिकता सामने आती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करना जरूरी है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि पार्टी सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी।
नारेबाजी के साथ दर्ज कराया विरोध
सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों से है। समाज को जातिगत भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठाने की जरूरत है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के सम्मान और सामाजिक बराबरी के अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता।
सामाजिक समानता और भाईचारे का लिया संकल्प
कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेसजनों ने ऐसी कथित विभाजनकारी एवं भेदभावपूर्ण मानसिकता के खिलाफ एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया। साथ ही सामाजिक समानता, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया।
पाकुड़ में आयोजित इस सत्याग्रह के जरिए कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि जाति और पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव की मानसिकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर का संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है और इसी संवैधानिक भावना को मजबूत करना ही लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की वास्तविक रक्षा है।


