Friday, August 14, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

एक लकीर खींची गई… और बिछड़ गए घर, रिश्ते और अपने! पाकुड़ में विभाजन की उस त्रासदी को किया गया याद

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पाकुड़। वर्ष 1947… देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था। करोड़ों भारतीय स्वतंत्रता की नई सुबह का इंतजार कर रहे थे, लेकिन इसी दौर में देश के विभाजन ने लाखों परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। एक ऐसी लकीर खींची गई, जिसने सिर्फ देश को दो हिस्सों में नहीं बांटा, बल्कि अनगिनत घरों, परिवारों, रिश्तों और सपनों को भी बिखेर दिया। लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई और करोड़ों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा।

इसी दर्दनाक इतिहास को याद करते हुए विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी पाकुड़ जिला इकाई की ओर से श्रद्धांजलि एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू ने की। इस दौरान 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।

कार्यक्रम में प्रदेश मंत्री कृष्णा महतो, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मीरा प्रवीण सिंह एवं दुर्गा मरांडी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। संगोष्ठी में पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विभाजन के दौरान हुई त्रासदी को याद करते हुए उस दौर की पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष पर अपने विचार रखे।

एक लकीर ने बदल दी करोड़ों लोगों की जिंदगी

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं प्रदेश मंत्री कृष्णा महतो ने कहा कि 14 अगस्त देश के इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्याय को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि 1947 में देश के विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपने घर, जमीन और संपत्ति को छोड़कर मजबूरन पलायन करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों को अमानवीय परिस्थितियों, हिंसा और यातनाओं का सामना करना पड़ा। अनेक परिवार अपने परिजनों से बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई। जिन लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, उन्हें भी नए स्थान पर शून्य से अपना जीवन शुरू करना पड़ा।

कृष्णा महतो ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य केवल इतिहास के दर्द को दोहराना नहीं है, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों को उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों, संघर्ष और पीड़ा से परिचित कराना भी है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को भूल न जाएं।

“इतिहास के उस दर्द को भूलना नहीं चाहिए”

भाजपा जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू ने विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिवस इतिहास के उस दुखद अध्याय को याद करने का अवसर है, जिसने देश और समाज पर गहरी छाप छोड़ी।

उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों ने ऐसी परिस्थितियों का सामना किया, जिसकी कल्पना करना भी आज मुश्किल है। अपने घर, जमीन और वर्षों की मेहनत से बनाई संपत्ति को छोड़कर अनजान जगहों की ओर पलायन करना उनके लिए कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अनेक विस्थापित परिवारों ने हिम्मत नहीं हारी और विपरीत परिस्थितियों में नए सिरे से अपना जीवन खड़ा किया। उनका संघर्ष और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

सरिता मुर्मू ने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें यह सीख देती है कि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

लाखों मौतें और करोड़ों लोगों का विस्थापन

प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दुर्गा मरांडी एवं मीरा प्रवीण सिंह ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय है। इस दौरान लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाए और करोड़ों लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा।

उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, उनके लिए वह त्रासदी सिर्फ इतिहास की कोई घटना नहीं थी, बल्कि उनके जीवन का ऐसा जख्म था, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की गई।

दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को और मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश की एकता को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को हमेशा सजग रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

श्रद्धांजलि के साथ लिया एकता का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने विभाजन में जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री रूपेश भगत ने किया।

संगोष्ठी में भाजपा जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय, जिला महामंत्री साधन ठाकुर, अनुग्राहित प्रसाद साह, विवेकानंद तिवारी, सोहन मंडल, सुरेश मंडल, सुकुमार मंडल, त्रिलोचन दास, दीपक साहा, पंकज साह, सुलेमान मुर्मू, प्राची चौधरी, धर्मेंद्र त्रिवेदी, निधि गुप्ता, विक्रांत राजवंशी, अरुण मंडल सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इतिहास से सबक लेकर भविष्य को मजबूत करने का संदेश

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर उस दौर की याद दिलाई, जब देश आजादी की ओर बढ़ रहा था, लेकिन उसी समय लाखों लोगों को अपने घरों और अपनों से बिछड़ने का असहनीय दर्द भी झेलना पड़ा।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को याद करने का उद्देश्य समाज में भय या विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचना है।

एक देश, एक समाज और एक मजबूत राष्ट्र के लिए आपसी विश्वास, भाईचारा, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना ही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। यही संदेश पाकुड़ में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की संगोष्ठी से भी सामने आया।

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