पाकुड़। बचपन किसी भी बच्चे के जीवन का वह दौर होता है, जब उसके हाथों में किताबें, आंखों में सपने और दिल में अपने भविष्य को लेकर उत्साह होना चाहिए। लेकिन जब इसी उम्र में शादी की जिम्मेदारियां थोप दी जाती हैं, तो सिर्फ एक बच्चे का बचपन ही नहीं छिनता, बल्कि उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक विकास और भविष्य पर भी गहरा असर पड़ता है। इसी गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति छात्र-छात्राओं को जागरूक करने के उद्देश्य से पाकुड़ में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर तथा प्रभारी सचिव डालसा सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी के मार्गदर्शन में हिरणपुर स्थित राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय में लीगल लिटरेसी क्लब के माध्यम से विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और समाज में मौजूद गंभीर कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करना था। शिविर में बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशे की समस्या, बाल श्रम, जादू-टोना तथा शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
बाल विवाह पर दो टूक संदेश—बचपन से समझौता नहीं
कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत के सदस्य राजीव कुमार झा ने बाल विवाह के मुद्दे पर छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से जागरूक किया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति ही नहीं, बल्कि कानून की नजर में भी अपराध है। निर्धारित उम्र से पहले लड़के या लड़की का विवाह कराना उनके अधिकारों का उल्लंघन है और इसके लिए कानूनी दंड का प्रावधान है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। विशेषकर बालिकाओं के लिए कम उम्र में विवाह उनके स्वास्थ्य, मानसिक विकास और आत्मनिर्भर बनने की संभावनाओं पर गंभीर असर डाल सकता है। कई बार बाल विवाह के कारण बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है और वे अपने सपनों तथा बेहतर भविष्य से दूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए समय रहते सूचना देना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को अपने आसपास बाल विवाह होने की जानकारी मिलती है, तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पैरा लीगल वॉलंटियर या नजदीकी थाना को इसकी सूचना दे सकता है।
“चुप रहना समाधान नहीं”—बच्चों को दी गई जिम्मेदारी
शिविर में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि सामाजिक बुराइयों को खत्म करने में केवल प्रशासन या कानून की भूमिका पर्याप्त नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर युवा पीढ़ी की जागरूकता महत्वपूर्ण है।
बच्चों को समझाया गया कि यदि उनके आसपास किसी नाबालिग की शादी की तैयारी हो रही हो, किसी बच्चे से जबरन मजदूरी कराई जा रही हो अथवा किसी परिवार को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा हो, तो ऐसी स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से इसकी सूचना देना जरूरी है।
विधिक जागरूकता शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि कानून की जानकारी केवल अदालत में जाने वाले लोगों के लिए जरूरी नहीं है। प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों और कानून के बारे में बुनियादी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वह स्वयं भी सुरक्षित रह सके और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी कर सके।
नशे से बचाने और नशे के आदी लोगों के पुनर्वास पर जोर
कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला ने नालसा की विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ से मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता के संबंध में विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने नालसा की नशा उन्मूलन एवं नशा पीड़ितों के पुनर्वास से संबंधित योजना के उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।
नशे की लत के कारण परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना कर सकते हैं। ऐसे लोगों को केवल अपराधी की नजर से देखने के बजाय उन्हें नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने और आवश्यक पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करें।
दहेज प्रथा के खिलाफ भी छात्रों को किया जागरूक
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार ने विद्यार्थियों को दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूक किया। उन्होंने दहेज से संबंधित कानूनी प्रावधानों और इसमें निर्धारित सजा के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि दहेज जैसी सामाजिक कुरीति का सबसे अधिक नुकसान परिवार और समाज की बेटियों को उठाना पड़ता है। दहेज के कारण कई परिवार आर्थिक दबाव में आ जाते हैं और कई मामलों में विवाह के बाद महिलाओं को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
छात्र-छात्राओं को समझाया गया कि दहेज लेना और देना दोनों ही समाज के लिए गंभीर समस्या हैं। युवाओं की सोच में बदलाव के बिना इस कुरीति को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। इसलिए आज के विद्यार्थियों को आगे चलकर दहेज मुक्त विवाह और समानता आधारित समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी होगी।
बाल श्रम और शिक्षा के अधिकार की भी मिली जानकारी
शिविर में बाल श्रम तथा शिक्षा के अधिकार को लेकर भी विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने और सुरक्षित वातावरण में अपने बचपन को जीने का अधिकार है।
कम उम्र के बच्चों से मजदूरी करवाना उनके विकास और शिक्षा के अवसरों को प्रभावित करता है। आर्थिक मजबूरी के कारण यदि कोई बच्चा पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो रहा है, तो समाज और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि उसे शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाए।
विधिक जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के अधिकारों और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है।
जादू-टोना जैसी कुरीतियों से बचने की अपील
कार्यक्रम में जादू-टोना जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि अंधविश्वास के नाम पर किसी व्यक्ति को प्रताड़ित करना या उसके साथ हिंसा करना समाज के लिए गंभीर खतरा है।
ऐसे मामलों में जागरूकता, शिक्षा और कानूनी जानकारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे अंधविश्वास के बजाय तर्क, शिक्षा और कानून पर भरोसा करें तथा किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना की घटना सामने आने पर उचित माध्यम से इसकी सूचना दें।
बच्चों को बताया—जरूरत पड़ने पर मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई।
उन्हें बताया गया कि जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए विधिक सेवा संस्थाएं कार्य करती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर या जरूरतमंद व्यक्ति उचित परिस्थितियों में निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।
इस जानकारी का उद्देश्य यह था कि आर्थिक कठिनाई के कारण कोई व्यक्ति अपने कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे और जरूरत पड़ने पर वह उचित कानूनी सहायता तक पहुंच सके।
बच्चों के बीच पहुंची कानून की पाठशाला
हिरणपुर के राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय में आयोजित यह शिविर महज एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। बाल विवाह, दहेज, नशा, बाल श्रम और शिक्षा जैसे विषयों पर विद्यार्थियों के बीच संवाद ने उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने बच्चों को यह संदेश दिया कि समाज में बदलाव की शुरुआत जागरूकता से होती है। यदि बच्चे और युवा कानून को समझेंगे, अपने अधिकारों को जानेंगे और गलत प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर और सुरक्षित समाज का निर्माण संभव होगा।
इस दौरान विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स मोलिता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, विजय कुमार राजवंशी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंचाया गया कि बचपन किसी भी कीमत पर विवाह, नशे, बाल श्रम या सामाजिक कुरीतियों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। समय रहते जागरूकता और कानून की जानकारी ही बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत माध्यम बन सकती है।


