पाकुड़। स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर्फ खुले आसमान के नीचे ही नहीं, बल्कि जेल की चारदीवारी के भीतर भी देखने को मिला। देश जब आजादी की वर्षगांठ मना रहा था, उसी अवसर पर पाकुड़ मंडल कारा में आयोजित जेल अदालत सह मेडिकल कैंप ने दो बंदियों के जीवन में भी राहत और नई उम्मीद की किरण जगाई। एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया के तहत अलग-अलग तीन वादों में स्वेच्छा से दोष स्वीकार करने वाले दो बंदियों को मुक्त किया गया।
झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मंडल कारा पाकुड़ में जेल अदालत सह मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के प्रभारी सचिव सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्जवल बेक, प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास तथा जेल के प्रशासनिक अधिकारी और चिकित्सक डॉ. एसके झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की।
प्ली बार्गेनिंग की जानकारी बनी बंदियों के लिए अहम
जेल अदालत के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से प्ली बार्गेनिंग के महत्व को समझाया और बताया कि कानून के तहत पात्र मामलों में यदि आरोपी स्वेच्छा से अपना दोष स्वीकार करता है, तो उसे कई तरह की कानूनी राहत मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि छोटे एवं सुलहनीय प्रकृति के मामलों में प्ली बार्गेनिंग के माध्यम से वाद के शीघ्र निपटारे का रास्ता खुल सकता है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय की बचत होने के साथ-साथ पात्र मामलों में सजा में राहत तथा जल्द रिहाई की संभावना भी बनती है।
न्यायिक पदाधिकारी ने बंदियों को यह भी बताया कि प्ली बार्गेनिंग प्रत्येक मामले में लागू नहीं होती। इसके लिए कानून में निर्धारित शर्तों और प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। बंदियों को यह जानकारी भी दी गई कि वे अपनी पात्रता और मामले की प्रकृति के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
दोष स्वीकार किया, दो बंदियों को मिली रिहाई
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष जेल अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया। अलग-अलग तीन वादों में स्वेच्छा से दोष स्वीकार करने के बाद दो बंदियों को मुक्त किया गया।
इस रिहाई ने जेल अदालत के उद्देश्य को भी खास बना दिया। एक ओर जहां बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी दी गई, वहीं दूसरी ओर पात्र बंदियों को कानून के तहत राहत भी उपलब्ध कराई गई।
निःशुल्क कानूनी सहायता की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों ने बंदियों से उनकी समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की जानकारी ली। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता एवं अन्य विधिक सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
बंदियों को बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर या ऐसे व्यक्ति जो अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें निर्धारित प्रावधानों के तहत विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
जेल में लगा मेडिकल कैंप, बीपी और शुगर की हुई जांच
जेल अदालत के साथ मंडल कारा परिसर में मेडिकल कैंप का भी आयोजन किया गया। मेडिकल टीम ने बंदियों के स्वास्थ्य की जांच करते हुए ब्लड प्रेशर, शुगर समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच की।
स्वास्थ्य जांच के दौरान बंदियों की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ली गई और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह भी दी गई। इससे जेल अदालत के साथ आयोजित यह कार्यक्रम कानूनी सहायता के साथ-साथ बंदियों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा।
न्याय, कानून और स्वास्थ्य—एक ही मंच पर
स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि न्यायिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पात्र व्यक्तियों को उनके अधिकारों की जानकारी देना, कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना भी है।
जेल की चारदीवारी के भीतर आयोजित इस पहल में जहां बंदियों को कानून की जानकारी मिली, वहीं दो बंदियों की रिहाई ने उनके लिए स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर को और भी यादगार बना दिया। दूसरी ओर मेडिकल कैंप के माध्यम से उनके स्वास्थ्य की चिंता भी की गई।
मौके पर न्यायिक पदाधिकारी, डालसा के कर्मी, जेल प्रशासनिक अधिकारी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख, संजीव कुमार मंडल, एलएडीसीएस के सहायक अजफर हुसैन विश्वास, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक एवं मेडिकल टीम के सदस्य मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, पाकुड़ मंडल कारा में आयोजित यह जेल अदालत सह मेडिकल कैंप स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कानूनी जागरूकता, न्यायिक राहत और मानवीय संवेदना का अनूठा संगम बनकर सामने आया।


