विदेश जाने वाले युवाओं की राह आसान करने से लेकर बेटियों की उच्च शिक्षा को घर की चौखट तक लाने की पहल, मुख्यमंत्री के सामने उठी पाकुड़ की दो बड़ी जरूरतें
पाकुड़। सपने अगर बड़े हों तो रास्ते भी बड़े चाहिए, लेकिन जब रास्ते ही दूरी बन जाएं तो मंजिल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। पाकुड़ के युवाओं और विद्यार्थियों के सामने आज कुछ ऐसी ही तस्वीर है। कोई रोजगार की तलाश में विदेश जाना चाहता है, कोई उच्च शिक्षा के लिए देश-दुनिया की ओर देख रहा है, तो कोई बेटी अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने का सपना संजोए बैठी है। मगर पासपोर्ट की प्रक्रिया और स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए जिले से बाहर जाने की मजबूरी इन सपनों के रास्ते में अतिरिक्त बोझ बन रही है।
इन्हीं जरूरतों को आवाज देने के लिए कांग्रेस जिला महासचिव अर्धेंदु गांगुली और झामुमो के पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य शाहिद इकबाल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और पाकुड़ के भविष्य से जुड़ी दो अहम मांगें उनके सामने रखीं। पहली मांग थी पाकुड़ जिला मुख्यालय में पासपोर्ट सेवा केंद्र की स्थापना, जबकि दूसरी मांग के.के.एम. कॉलेज में स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम शुरू करने की रही।
पासपोर्ट के लिए बाहर क्यों जाए पाकुड़?
पाकुड़ से बड़ी संख्या में युवा रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। इसके अलावा जिले के कई लोग हज जैसे धार्मिक सफर के लिए भी विदेश की यात्रा करते हैं। ऐसे में पासपोर्ट एक दस्तावेज भर नहीं, बल्कि उनके सफर और भविष्य की पहली सीढ़ी है।
लेकिन इस जरूरी दस्तावेज से जुड़ी प्रक्रिया के लिए जिले के लोगों को बाहर जाना पड़ता है। इसका अर्थ है—अतिरिक्त यात्रा, अतिरिक्त खर्च और कामकाजी दिनों का नुकसान।
मुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखी गई कि पाकुड़ में ही पासपोर्ट सेवा केंद्र उपलब्ध कराया जाए, ताकि लोगों को छोटी-सी प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए दूसरे शहरों की दौड़ न लगानी पड़े।
एक पासपोर्ट केंद्र, हजारों परिवारों के लिए राहत
इस मांग की अहमियत उस परिवार से पूछी जा सकती है, जिसके घर का युवा रोजगार के लिए विदेश जाने की तैयारी कर रहा हो। पासपोर्ट की प्रक्रिया के लिए बाहर जाने में लगने वाला पैसा भले किसी संपन्न व्यक्ति के लिए छोटा हो, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यही खर्च कई बार बड़ी चिंता बन जाता है।
पाकुड़ में पासपोर्ट सेवा केंद्र खुलने से युवाओं, छात्रों, कामगारों और विदेश यात्रा करने वाले आम नागरिकों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सकेगी। यह पहल समय और पैसे दोनों की बचत के साथ प्रशासनिक सेवाओं को लोगों के करीब लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
KKM कॉलेज में PG नहीं, तो प्रतिभा कितनी दूर जाएगी?
दूसरी मांग शिक्षा के उस सवाल से जुड़ी है, जिसका जवाब पाकुड़ के हजारों विद्यार्थी तलाश रहे हैं।
के.के.एम. कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई के बाद PG के लिए विद्यार्थियों को दुमका स्थित सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि विद्यार्थी को कितनी दूर जाना पड़ता है। असली सवाल यह है कि क्या हर विद्यार्थी के परिवार के पास इतना आर्थिक सामर्थ्य है कि वह अपने बच्चे की आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में रहने का खर्च उठा सके?
यात्रा का खर्च, किराया, भोजन और रहने की व्यवस्था—ये सभी खर्च मिलकर उच्च शिक्षा को कई परिवारों के लिए महंगा बना देते हैं। विशेषकर छात्राओं के लिए दूसरे शहर जाकर पढ़ाई जारी रखना कई बार परिवार के सामने अतिरिक्त सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी खड़ी करता है।
PG की पढ़ाई शुरू हुई तो बदल सकती है तस्वीर
KKM कॉलेज में PG पाठ्यक्रम शुरू होने से पाकुड़ के विद्यार्थियों को अपने ही जिले में उच्च शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलेगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ कम हो सकता है।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग से PG कक्षाएं शुरू करने के साथ आवश्यक शिक्षकों के पद सृजित करने तथा प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का आग्रह किया गया है।
क्योंकि शिक्षा केवल डिग्री का नाम नहीं है। अच्छी शिक्षा के लिए शिक्षक चाहिए, पुस्तकालय चाहिए, प्रयोगशाला चाहिए और ऐसा वातावरण चाहिए जिसमें विद्यार्थी अपने सपनों को आकार दे सकें।
एक मांग युवाओं की उड़ान के लिए, दूसरी विद्यार्थियों की जड़ों को मजबूत करने के लिए
देखा जाए तो दोनों मांगों की दिशा अलग है, लेकिन मंजिल एक ही है—पाकुड़ के लोगों को बेहतर अवसर अपने ही जिले में उपलब्ध कराना।
पासपोर्ट सेवा केंद्र की मांग उस युवा के लिए है जो रोजगार या शिक्षा की तलाश में विदेश की ओर कदम बढ़ाना चाहता है। वहीं KKM कॉलेज में PG की मांग उस विद्यार्थी के लिए है जो स्नातक के बाद अपनी पढ़ाई को अधूरा छोड़ना नहीं चाहता।
एक मांग पाकुड़ से दुनिया तक पहुंचने की राह आसान करने की है, तो दूसरी दुनिया की शिक्षा तक पहुंचने के लिए पाकुड़ छोड़ने की मजबूरी कम करने की।
यही वजह है कि इन मांगों को केवल राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इनके पीछे जिले के उन परिवारों की उम्मीदें हैं, जो चाहते हैं कि उनके बच्चों को आगे बढ़ने के लिए अवसर मिले, लेकिन अवसर की तलाश में उन्हें अपनी आर्थिक सीमाओं से संघर्ष न करना पड़े।
अब निगाह सरकार के अगले कदम पर
मुख्यमंत्री के समक्ष दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे रखे जाने के बाद अब पाकुड़वासियों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की ओर है। लोगों को उम्मीद है कि इन मांगों को केवल आश्वासन तक सीमित न रखकर इन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस पहल होगी।
क्योंकि पाकुड़ के युवाओं को अपने सपनों के लिए सिर्फ हौसला नहीं, सुविधाओं की सीढ़ी भी चाहिए। विद्यार्थियों को पढ़ने की ललक के साथ अपने ही जिले में आगे बढ़ने का अवसर भी चाहिए।
शायद विकास की असली तस्वीर तब बनेगी, जब पाकुड़ का युवा पासपोर्ट के लिए जिले से बाहर जाने को मजबूर न हो और KKM कॉलेज का विद्यार्थी PG की पढ़ाई के लिए अपना घर छोड़ने को मजबूर न हो।
पाकुड़ की इन दो मांगों में इसलिए सिर्फ दो सुविधाओं की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे भविष्य की दस्तक है, जहां जिले के सपनों को दूरी नहीं, अवसर तय करेंगे।


