जब कानून ने संवेदना के साथ थामा बुजुर्गों का हाथ
पाकुड़। उम्र का आखिरी पड़ाव अक्सर अपने साथ धीमी होती चाल, कमजोर होती आंखें और बीते दिनों की लंबी स्मृतियां लेकर आता है। ऐसे समय में किसी का हाल पूछ लेना, कुछ पल साथ बैठना और यह एहसास दिलाना कि समाज आज भी आपके साथ खड़ा है। कभी-कभी यही सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर पाकुड़ में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की पहल ने इसी संवेदना को जीवंत किया।
वृद्धाश्रम पहुंचकर जाना बुजुर्गों का हाल
झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में सोनाजोड़ी स्थित वृद्धाश्रम में कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद के निर्देश पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो वृद्धाश्रम पहुंचीं।
उन्होंने वृद्धजनों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली, उनका हालचाल पूछा और उनकी समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास किया। इस दौरान वृद्धजनों के बीच फल का भी वितरण किया गया।
यह मुलाकात महज एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। बातचीत के दौरान बुजुर्गों की जरूरतों और उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को जानने की कोशिश की गई, ताकि सहायता और संरक्षण की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
सिर्फ हाल नहीं पूछा, सुविधाओं की भी परखी हकीकत
वृद्धाश्रम में रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की जिंदगी केवल बातचीत का विषय नहीं बनी, बल्कि वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का भी जायजा लिया गया। साफ-सफाई, पेयजल, रसोई, शयन कक्ष सहित अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया।
किसी वृद्धाश्रम की दीवारें केवल भवन नहीं होतीं, उनके भीतर कई जीवनों की कहानियां सांस लेती हैं। इसलिए वहां रहने वाले बुजुर्गों के लिए भोजन, पानी, स्वच्छता और रहने की सुविधा केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार हैं। इसी दृष्टि से सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली गई।
सम्मान के साथ समझाए गए अधिकार
कार्यक्रम के दौरान जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी सेवाओं से संबंधित प्रावधानों और उनके उद्देश्यों की जानकारी दी गई।
बुजुर्गों को बताया गया कि उम्र बढ़ने के साथ उनके अधिकार कम नहीं होते। समाज में कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, गरिमा, सुरक्षा और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है।
कानून की जानकारी कई बार उस व्यक्ति के लिए उम्मीद की पहली किरण बन जाती है, जिसे लगता है कि उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। इसी सोच के साथ वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जागरूक किया गया।
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण की जानकारी
शिविर में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के संबंध में भी जानकारी दी गई। वरिष्ठ नागरिकों को उनके भरण-पोषण और कल्याण से जुड़े कानूनी अधिकारों के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानून की धाराओं को बताना नहीं था, बल्कि बुजुर्गों को यह विश्वास दिलाना भी था कि जरूरत पड़ने पर वे कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं और अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए उचित माध्यम का सहारा ले सकते हैं।
जब अधिकारों की जानकारी बनी आत्मविश्वास की आवाज
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान केवल फूल या फल देने तक सीमित नहीं है। असली सम्मान तब है, जब उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी हो और वे अपने जीवन से जुड़े निर्णयों तथा समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध कानूनी रास्तों से परिचित हों।
डालसा की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने इसी सामाजिक जिम्मेदारी को सामने रखा। बुजुर्गों को उनके अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना समाज में संवेदनशीलता और कानूनी चेतना दोनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
15100 पर मिल सकती है कानूनी सहायता की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को नालसा के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के संबंध में भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कानूनी सहायता के माध्यम से जोड़ना है।
यह जानकारी उन बुजुर्गों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें किसी कानूनी समस्या में मार्गदर्शन की आवश्यकता हो और वे यह नहीं जानते हों कि सहायता के लिए कहां संपर्क किया जाए।
एक दिन का कार्यक्रम, लेकिन संदेश बहुत बड़ा
अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम समाज को एक गहरा संदेश देता है—बुजुर्ग केवल सहायता के पात्र नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार के अधिकारी हैं।
जिन हाथों ने कभी परिवार और समाज को संभालने में अपना जीवन लगा दिया, जीवन की सांझ में उन्हीं हाथों को सहारे की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे समय में संवेदना, सम्मान और कानून—तीनों का साथ मिलना जरूरी है।
सोनाजोड़ी के वृद्धाश्रम में हुई यह मुलाकात इसी मानवीय भावना की एक तस्वीर बनकर सामने आई, जहां कानून केवल किताबों और अदालतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह वृद्धजनों के बीच पहुंचकर उनके जीवन, उनकी जरूरतों और उनके अधिकारों से जुड़ता दिखाई दिया।
मौके पर मौजूद रहे डालसा कर्मी और वृद्धाश्रम के कर्मचारी
कार्यक्रम के दौरान डालसा के कर्मी, वृद्धाश्रम के कर्मचारी एवं वहां रहने वाले वृद्धजन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, उनके अधिकारों की रक्षा और उन्हें उपलब्ध कानूनी सहायता के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।
उम्र की शाम चाहे कितनी भी शांत क्यों न हो, यदि साथ में सम्मान की रोशनी और अधिकारों का भरोसा हो तो अकेलापन कुछ कम महसूस होता है। यही इस पहल का सबसे मानवीय पक्ष रहा बुजुर्गों को यह एहसास दिलाना कि जीवन की सांझ में भी वे समाज की जिम्मेदारी और कानून की नजर में महत्वपूर्ण हैं।


