Tuesday, October 27, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

मोदी के दिवंगत माता-पिता पर कथित टिप्पणी से भड़के अमृत पांडेय, कांग्रेस से माफी और खड़गे की बर्खास्तगी की मांग

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पाकुड़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत माता-पिता के प्रति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अमृत पांडेय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने टिप्पणी की निंदा करते हुए कांग्रेस से देश से माफी मांगने और खड़गे को पद से बर्खास्त करने की मांग की है।

अमृत पांडेय ने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी के दिवंगत माता-पिता के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना सामाजिक शिष्टाचार और मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है।

राजनीतिक बयानबाजी और भाषा की मर्यादा पर उठाए सवाल

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं ने अतीत में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने सोनिया गांधी की कथित टिप्पणी और प्रधानमंत्री को ‘मौत का सौदागर’ तथा ‘चायवाला’ कहे जाने जैसे राजनीतिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की आलोचना की।

पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को एक-दूसरे की नीतियों, फैसलों और विचारधाराओं की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उनके अनुसार, राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत या पारिवारिक अपमान का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी’

अमृत पांडेय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं के शब्दों और व्यवहार का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे राजनीतिक बहस के दौरान संयम और जिम्मेदारी का परिचय दें।

उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। राजनीतिक संवाद में शालीनता बनाए रखना सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है।

कांग्रेस से माफी और कार्रवाई की मांग

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने संबंधित टिप्पणी की निंदा करते हुए कांग्रेस से देश से माफी मांगने की मांग की। साथ ही उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को उनके पद से बर्खास्त करने की भी मांग रखी।

पांडेय ने कहा कि राजनीतिक दलों को वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और सामाजिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक संवाद में संवेदनशीलता, शिष्टाचार और संयम आवश्यक हैं।

नोट: यह समाचार अमृत पांडेय के बयान पर आधारित है। मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित टिप्पणी के मूल शब्दों, संदर्भ और इस मामले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।

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