पाकुड़। राखी केवल रेशम के धागों से बना एक बंधन नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास, आत्मीयता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। इसी भाव को रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय डाक विभाग की ओर से आयोजित ‘राखी बनाओ और भेजो प्रतियोगिता-2026’ में पाकुड़ के चार विद्यालयों के 149 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
संथाल परगना डिवीजन के पाकुड़ उप डाक मंडल के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता में यूएचएस नवीनगर, सेंट जोसेफ स्कूल, डीपीएस पाकुड़ तथा राज प्लस टू सीएम जिला स्कूल के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतियोगिता ने बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता को आकार देने और भारतीय संस्कृति से जुड़े एक महत्वपूर्ण पर्व को रचनात्मक दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया।
डीपीएस पाकुड़ के सर्वाधिक 61 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
विद्यालयवार सहभागिता के अनुसार, यूएचएस नवीनगर से 21, सेंट जोसेफ स्कूल से 31, डीपीएस पाकुड़ से 61 तथा राज प्लस टू सीएम जिला स्कूल से 36 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। इस प्रकार चारों विद्यालयों के कुल 149 विद्यार्थियों की सहभागिता दर्ज की गई। उपलब्ध डाक विभागीय प्रमाण पत्रों के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय से 10-10 प्रतिभागियों के नाम भी दर्ज किए गए हैं।
रचनात्मकता के साथ संस्कृति और संस्कारों की सीख
इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक भावना को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और रक्षाबंधन के भावनात्मक महत्व के प्रति उनकी रुचि विकसित करना है। ऐसी गतिविधियां बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से परे सीखने, अपनी कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्त करने तथा सांस्कृतिक परंपराओं के मूल भाव को समझने का अवसर देती हैं।
राखी बनाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में कलात्मक अभिरुचि, मौलिक चिंतन और अपनी भावनाओं को सृजन के रूप में व्यक्त करने की क्षमता विकसित हो सकती है। साथ ही, यह पहल उन्हें भारतीय त्योहारों के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने का माध्यम भी बनती है।
सृजनशीलता से समृद्ध होती शिक्षा
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना भी है। इस दृष्टि से डाक विभाग की यह पहल बच्चों को सीखने का एक ऐसा अवसर प्रदान करती है, जिसमें कला के माध्यम से परंपरा से जुड़ने और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर मिलता है।
पाकुड़ के चार विद्यालयों के 149 विद्यार्थियों की सहभागिता इस बात को रेखांकित करती है कि शैक्षणिक गतिविधियों के साथ रचनात्मक और सांस्कृतिक आयोजनों का भी विशेष महत्व है। ऐसी पहलें विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, नए विचारों को आकार देने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।


