पाकुड़। कुछ विदाइयां केवल किसी व्यक्ति के जाने की खबर नहीं होतीं, वे अपने पीछे एक ऐसा खालीपन छोड़ जाती हैं, जिसे शब्दों में भर पाना आसान नहीं होता। झामुमो के वरिष्ठ नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन ने भी पार्टी के साथियों और समर्थकों के बीच ऐसा ही गहरा शून्य पैदा किया है। उनके निधन की खबर ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों तक को भीतर तक झकझोर दिया है।
इसी पीड़ा और भावनाओं के बीच आज पाकुड़ जिले के धनुषपूजा स्थित जिला झामुमो कार्यालय में जिलाध्यक्ष अजीजुल ईस्लाम के नेतृत्व में शोकसभा आयोजित की गई। कार्यालय का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था। चेहरों पर खामोशी थी, आंखों में नमी थी और हर ओर एक ऐसे नेता की स्मृतियां थीं, जिसने संगठन और सरकार के बीच अपनी अलग पहचान बनाई थी।
शोकसभा की शुरुआत दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। सबसे पहले जिलाध्यक्ष अजीजुल ईस्लाम ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पूर्व जिलाध्यक्ष सह केंद्रीय समिति सदस्य श्याम यादव, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सुनील टुडू, महिला जिलाध्यक्ष जोसेफिना हेम्ब्रम सहित उपस्थित पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर दिवंगत नेता को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया। उस खामोशी में मानो हर कोई अपने-अपने तरीके से सुदिव्य कुमार सोनू को याद कर रहा था। किसी के पास कहने को शब्द नहीं थे, लेकिन आंखों और चेहरे की उदासी बहुत कुछ कह रही थी। कार्यकर्ताओं ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
‘पार्टी के मजबूत स्तंभ थे सुदिव्य कुमार सोनू’
इस अवसर पर झामुमो जिलाध्यक्ष अजीजुल ईस्लाम ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू पार्टी के एक मजबूत स्तंभ थे। उनके पास उच्च शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी और उन्होंने अपनी कार्यशैली, क्षमता और दूरदृष्टि से इन जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।
उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील, सहज और जनसरोकार से जुड़े हुए व्यक्ति थे। संगठन से लेकर सरकार तक उन्होंने जिस जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाई, वह हमेशा याद की जाएगी।
अजीजुल ईस्लाम ने कहा कि उनके असामयिक निधन से झामुमो को ही नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक और सामाजिक जगत को गहरा आघात पहुंचा है। उनकी कार्यशैली, सहजता और लोगों के प्रति मधुर व्यवहार लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।
श्याम यादव बोले—‘निधन की खबर स्तब्ध करने वाली’
पूर्व जिलाध्यक्ष सह केंद्रीय समिति सदस्य श्याम यादव ने सुदिव्य कुमार सोनू के निधन को अत्यंत दुखद और स्तब्ध करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ और समर्पित नेता का इस तरह असमय चले जाना बेहद पीड़ादायक है। उनके निधन की खबर से मन अत्यंत व्यथित है। पार्टी के सभी कार्यकर्ता उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
दरअसल, किसी संगठन के लिए उसके नेता का जाना केवल एक पद का खाली होना नहीं होता। कई बार किसी व्यक्ति के जाने के साथ विचारों, अनुभवों और आत्मीय रिश्तों का एक पूरा संसार पीछे छूट जाता है। सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झामुमो कार्यकर्ताओं की भावनाओं में यही खालीपन साफ दिखाई दिया।
श्रद्धांजलि देने उमड़ा संगठन
शोकसभा में केंद्रीय समिति सदस्य उमर फारूक, केंद्रीय समिति सदस्य मिथिलेष घोष, जिला सह सचिव जहूर आलम, महिला मोर्चा जिला सचिव सुशीला देवी, अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष कदम रसूल, जिला सचिव दिलीप मरांडी, नगर अध्यक्ष मुकेश सिंह, पाकुड़ प्रखंड अध्यक्ष मुसलोद्दीन शेख, सचिव राजेश सरकार, लिट्टीपाड़ा प्रखंड अध्यक्ष प्रसाद हांसदा, अमड़ापाड़ा प्रखंड अध्यक्ष श्यामलाल हांसदा, सचिव जहीरुद्दीन मियां सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा बुद्धिजीवी मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष प्रकाश सिंह, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष सगीर अंसारी, जिला कार्यकारिणी सदस्य मंटू भगत, अली हुसैन अंसारी, जिला सदस्य फिलीप मुर्मू, पाकुड़ प्रखंड उपाध्यक्ष अजफारुल शेख, अमड़ापाड़ा प्रखंड उपाध्यक्ष इमरान अंसारी, जिला मीडिया प्रभारी आफताब आलम सहित सोनू आलम, मोसरर्फ हुसैन, फुरकान शेख, सबूर अंसारी, इमदादुल अंसारी, अबुल कलाम, आलमगीर आलम, जाकिर हुसैन, रविनाथ टुडू, कोर्नेलियुस मुर्मू, ईस्लाम अंसारी, मोबारक हुसैन सहित अन्य वरिष्ठ एवं सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सुदिव्य कुमार सोनू अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन किसी संवेदनशील नेता की पहचान उसके पद से नहीं, उसके कर्मों और लोगों के दिलों में छोड़ी गई छाप से होती है। शायद यही वजह है कि आज पाकुड़ के झामुमो कार्यालय में उनके चित्र के सामने झुके सिर केवल श्रद्धांजलि नहीं दे रहे थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व को विदाई दे रहे थे जिसकी यादें लंबे समय तक संगठन और जनमानस के बीच जीवित रहेंगी।


