पाकुड़ में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी; संविधान, लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज की रक्षा का लिया संकल्प
पाकुड़ | पाकुड़ की सियासी फिजा सोमवार की शाम अचानक गर्म हो उठी। सड़क पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम था, जुबान पर नारे थे और निशाने पर केंद्र सरकार। मौका था लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के विरोध का। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमिटी, पाकुड़ ने शाम 5:30 बजे विशाल विरोध प्रदर्शन और केंद्र सरकार का पुतला दहन किया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। देखते ही देखते विरोध की आवाज तेज होती गई और पुतला दहन के साथ कांग्रेस ने अपने राजनीतिक तेवर का खुला प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने इसे महज एक प्राथमिकी का विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्ष की आवाज की रक्षा की लड़ाई करार दिया।
FIR पर कांग्रेस का सीधा सवाल—विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश क्यों?
कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष सरकार से सवाल करता है और जनता के मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक उठाता है। ऐसे में विपक्ष की आवाज को डराने या दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक असहमति को दबाने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती सत्ता में नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछने की आजादी में है।
उत्तराखंड का मुद्दा भी उठा, भाजपा कार्यकर्ताओं पर FIR की मांग
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड में भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई। कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि यदि कानून सबके लिए समान है तो कार्रवाई का पैमाना भी समान होना चाहिए।
कांग्रेस का तर्क था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की कसौटी पर व्यक्ति की राजनीतिक पहचान नहीं, बल्कि उसका आचरण देखा जाना चाहिए। इसी आधार पर पार्टी ने उत्तराखंड में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
सड़क पर दिखा कांग्रेस का आक्रोश, पुतले की आग में दिखा सियासी संदेश
जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री कुमार सरकार के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में विरोध का भाव और नारों में राजनीतिक आक्रोश साफ दिखाई दिया। केंद्र सरकार के पुतला दहन के साथ कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि आने वाले दिनों में वह इस मुद्दे को लेकर अपना आंदोलन और तेज कर सकती है।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सिर्फ सदन के भीतर बोलने तक सीमित नहीं है। जब उन्हें लगता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो सड़क पर उतरकर आवाज उठाना भी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है।
श्री कुमार सरकार के नेतृत्व में जुटे कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता
कार्यक्रम में प्रखंड अध्यक्ष मानसारुल हक, विधायक प्रतिनिधि गोलम अहमद उर्फ बकुल, मुख्तार हुसैन, शाहीन परवेज, मनवार आलम, अब्दुल बसीर शेख, डॉ. जोहरुल इस्लाम, मिथुन मरांडी, मोहम्मद सिराजुद्दीन, मोतिउर रहमान, डब्ल्यू. शेख और तरीकुल शेख समेत जिला कांग्रेस कमिटी के पदाधिकारी, विभिन्न विभागों एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं की नारेबाजी से माहौल लगातार गूंजता रहा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को डराने-धमकाने या राजनीतिक दबाव में लाने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
कांग्रेस का संदेश साफ—“संविधान की आवाज दबेगी नहीं”
पाकुड़ में हुए इस विरोध प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने अपने राजनीतिक संघर्ष का एजेंडा साफ करने की कोशिश की। पार्टी ने लोकतंत्र, संविधान और विपक्ष की स्वतंत्र आवाज को केंद्र में रखते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला बोला।
कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं, बल्कि असहमति को सम्मान देने का भी नाम है। विपक्ष की आवाज को कमजोर करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के समान है।
पाकुड़ की शाम ढल गई, पुतले की आग बुझ गई, नारे थम गए—लेकिन कांग्रेस के इस प्रदर्शन ने जिले की सियासत में एक नया सवाल जरूर छोड़ दिया है।
क्या विपक्ष की आवाज को FIR और राजनीतिक दबाव से रोका जा सकता है?
कांग्रेस का जवाब फिलहाल साफ है—नहीं। संघर्ष जारी रहेगा, आवाज उठती रहेगी और संविधान की रक्षा की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।


