सलाखों के बीच पहुंची कानून और संवेदना की रोशनी
पाकुड़। सलाखें किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर सकती हैं, लेकिन न्याय पाने का अधिकार नहीं। इसी मानवीय विचार को केंद्र में रखते हुए गांधी जयंती के अवसर पर पाकुड़ मंडल कारा में जेल अदालत सह मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। जेल की चारदीवारी के भीतर आयोजित इस पहल में बंदियों तक कानून की जानकारी, निःशुल्क विधिक सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया गया।
गांधी और शास्त्री के विचारों के स्मरण से हुई शुरुआत
झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार कुमार क्रांति प्रसाद के निर्देश पर किया गया। डालसा सचिव रूपा बंदना किरो की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई।
इस अवसर पर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को स्मरण किया गया। सत्य, अहिंसा, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के विचारों के बीच कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि न्याय की व्यवस्था में संवेदना का स्थान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बंदियों को बताया गया निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार
डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और डालसा की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से कोई व्यक्ति कानूनी सहायता से वंचित न रहे, इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने बंदियों को अपने मामलों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को समझने और उपलब्ध विधिक विकल्पों का उचित तरीके से उपयोग करने के लिए जागरूक किया।
प्ली बार्गेनिंग से जल्द न्याय की राह समझाई
कार्यक्रम में प्ली बार्गेनिंग के महत्व और प्रक्रिया पर विशेष रूप से जानकारी दी गई। बंदियों को बताया गया कि कानून में निर्धारित परिस्थितियों में पात्र मामलों में प्ली बार्गेनिंग का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
इसके माध्यम से पात्र मामलों में मामले के शीघ्र निपटारे, समय की बचत तथा कानून के अनुरूप मिलने वाले लाभों की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी समझाया गया कि प्ली बार्गेनिंग हर मामले में लागू नहीं होती और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया एवं शर्तों का पालन आवश्यक है।
जमानत और कानूनी अधिकारों पर भी हुई चर्चा
डीएसपी मुख्यालय उज्ज्वल कुमार साहा ने भी बंदियों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। वक्ताओं ने जमानत से संबंधित कानून, निःशुल्क कानूनी सहायता और बंदियों के उपलब्ध अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानूनी शब्दावली समझाना नहीं था, बल्कि बंदियों को यह एहसास कराना भी था कि कानून के दायरे में उनके अधिकार और उनके लिए उपलब्ध विधिक रास्ते मौजूद हैं।
इलाज की रोशनी भी पहुंची जेल की चारदीवारी तक
कानूनी जागरूकता के साथ बंदियों के स्वास्थ्य को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मंडल कारा परिसर में आयोजित मेडिकल कैंप में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान बीपी, शुगर सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच की गई और बंदियों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली गई।
न्याय के साथ स्वास्थ्य की यह पहल कार्यक्रम को मानवीय संवेदना का एक और आयाम देती नजर आई। एक ओर जहां बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी मिली, वहीं दूसरी ओर उनके शरीर और स्वास्थ्य की चिंता भी की गई।
कानून, स्वास्थ्य और संवेदना—एक साथ दिखाई दी तस्वीर
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम जेल की चारदीवारी के भीतर कानून और मानवीय संवेदना के बीच एक सेतु की तरह सामने आया। अदालत की प्रक्रिया और कानूनी जानकारी ने जहां अधिकारों की समझ बढ़ाई, वहीं मेडिकल कैंप ने स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम में डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, डीएसपी मुख्यालय उज्ज्वल कुमार साहा, डॉ. एसके झा, एलएडीसीएस डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख, संजीव कुमार मंडल, एलएडीसीएस सहायक अजफर हुसैन विश्वास सहित जेल प्रशासन के अधिकारी, डालसा कर्मी, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक एवं मेडिकल टीम के सदस्य मौजूद रहे।
सलाखों के बीच उम्मीद का एक संदेश
गांधी जयंती के दिन पाकुड़ मंडल कारा में आयोजित इस पहल ने यह रेखांकित किया कि न्याय केवल अदालत के फैसले तक सीमित नहीं है। न्याय की प्रक्रिया में जानकारी, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा भी महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
सलाखों के बीच जीवन भले ही सीमित हो, लेकिन उम्मीद का रास्ता बंद नहीं होता। जेल अदालत और मेडिकल कैंप के माध्यम से बंदियों तक पहुंची कानून और इलाज की यह पहल उसी उम्मीद को एक संवेदनशील स्पर्श देती दिखाई दी।


