जहां सेवा केवल कर्म नहीं, साधना बन जाती है
पाकुड़। शनिवार का दिन था। कुछ चेहरों पर बीमारी की चिंता थी, कुछ आंखों में इलाज की उम्मीद और कुछ मन में इस सवाल का बोझ कि बीमारी के सामने आर्थिक मजबूरी कितनी बड़ी दीवार बन सकती है। लेकिन छोटी अलीगंज स्थित श्री सत्य साईं सेवा समिति के परिसर में पहुंचते ही इन चिंताओं के बीच सेवा का एक ऐसा द्वार खुला, जहां इलाज के बदले किसी कीमत की मांग नहीं थी सिर्फ इंसानियत थी।
भगवान श्री सत्य साईं बाबा की कृपा एवं प्रेरणा से प्रत्येक शनिवार की तरह इस शनिवार भी समिति की ओर से निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित किया गया। शिविर में कुल 136 रोगियों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श किया गया तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
दूर गांवों से आए लोग, साथ लेकर लौटे उम्मीद
इस सेवा शिविर में केवल शहर के लोग ही नहीं पहुंचे, बल्कि आसपास के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों से भी जरूरतमंद मरीज आए। बड़ी अलीगंज, बलिया दंगा, पंचकठिया, कालिकापुर, देवपुर, बाबूपुर, हिरणपुर, मोहनपुर, चांदपुर, मालदा, करनाडंगा और महेशपुर सहित विभिन्न इलाकों से लोग स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे।
किसी के चेहरे पर बीमारी की थकान थी तो किसी के भीतर लंबे समय से चले आ रहे दर्द की कहानी। मगर चिकित्सकों की जांच, बातचीत और परामर्श के बाद कई चेहरों पर राहत की अनुभूति दिखाई दी। निःशुल्क दवा ने उस राहत को और मजबूत किया।
चिकित्सकों ने निभाया सेवा का धर्म
शिविर में डॉ. ज्योति ठाकुर और डॉ. देवकांत ठाकुर ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। दोनों चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझा और आवश्यक परामर्श दिया।
चिकित्सा विज्ञान जहां बीमारी की पहचान और उपचार का रास्ता दिखाता है, वहीं सेवा की भावना उस उपचार को मानवीय स्पर्श देती है। इसी स्पर्श के कारण चिकित्सा शिविर महज जांच केंद्र नहीं रहा, बल्कि जरूरतमंदों के लिए भरोसे का स्थान बन गया।
‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ का जीवंत संदेश
श्री सत्य साईं सेवा समिति के सदस्यों के अनुसार जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना समिति की सेवा गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। “सेवा ही साधना है और मानव सेवा ही माधव सेवा है” की भावना के साथ नियमित रूप से ऐसे निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं।
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में सेवा को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं माना गया है। जब किसी पीड़ित के दर्द को अपना दर्द समझकर उसके उपचार में सहयोग किया जाता है, तो सेवा स्वयं साधना का स्वरूप ले लेती है। इसी विचार की झलक छोटी अलीगंज में आयोजित इस शिविर में भी दिखाई दी।
भक्ति जब समाज के दर्द को समझती है
भक्ति केवल मंदिर की घंटियों, प्रार्थनाओं और आराधना तक सीमित नहीं होती। उसका सबसे सुंदर रूप तब सामने आता है, जब किसी जरूरतमंद की आंखों में उम्मीद जगती है और किसी असहाय व्यक्ति को सहारा मिलता है।
136 मरीजों की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और जरूरतमंदों को दवाओं का वितरण इसी भावना की एक तस्वीर बनकर सामने आया। यहां सेवा करने वाला हाथ और सहायता पाने वाला हाथ दोनों के बीच इंसानियत का वह रिश्ता दिखाई दिया, जो किसी जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति की सीमा नहीं पहचानता।
हर शनिवार, उम्मीद की एक नई किरण
श्री सत्य साईं सेवा समिति की यह नियमित पहल उन लोगों के लिए विशेष मायने रखती है, जिनके लिए स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचना कई बार आर्थिक या भौगोलिक कारणों से कठिन हो जाता है। ऐसे में हर शनिवार आयोजित होने वाला यह शिविर उनके लिए उम्मीद का एक ऐसा दरवाजा बनता जा रहा है, जो नियमित रूप से खुलता है।
यहां मिलने वाली सेवा केवल दवा की पुड़िया नहीं है। यह उस विश्वास का नाम है कि समाज में आज भी ऐसे हाथ मौजूद हैं, जो किसी अनजान व्यक्ति के दर्द को देखकर आगे बढ़ते हैं।
दवा से आगे, दिल तक पहुंचती है सेवा
बीमारी शरीर को कमजोर कर सकती है, लेकिन संवेदना मन को मजबूत करती है। छोटी अलीगंज में आयोजित इस मेडिकल कैंप ने एक बार फिर यही संदेश दिया कि जब चिकित्सा के साथ करुणा जुड़ती है, तो इलाज का अर्थ और व्यापक हो जाता है।
136 मरीजों के लिए यह शनिवार केवल एक मेडिकल कैंप का दिन नहीं रहा। किसी के लिए यह जरूरी दवा पाने का दिन था, किसी के लिए बीमारी को समझने का अवसर और किसी के लिए यह विश्वास करने का क्षण कि मानवता की लौ अभी भी जल रही है।
और शायद यही उस सेवा का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अर्थ है ईश्वर की आराधना केवल उनके स्वरूप के सामने झुकने में नहीं, बल्कि उनके ही रूप में मौजूद किसी पीड़ित इंसान का हाथ थामने में भी है।


