🪔 श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई बुद्ध पूर्णिमा
पाकुड़ नगर में बुद्ध पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर इस दिन को विशेष बनाया। रेलवे कॉलोनी स्थित सिद्धार्थ नगर के मुख्य द्वार पर स्थापित भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति के संदेश से भर उठा।
🌸 प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि
इस अवसर पर वार्ड पार्षद निभा देवी के नेतृत्व में भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने एकजुट होकर अहिंसा, करुणा और सत्य के प्रतीक बुद्ध को नमन किया। इस दौरान पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर परिषद उपाध्यक्ष राणा ओझा उपस्थित रहे। उनके साथ वार्ड पार्षद तनु दास, कृष्ण शर्मा, अनिकेत गोस्वामी, पूनम देवी, विमल चंद्र राउत, गुड्डू कुमार भगत, मुस्ताक अंसारी, रियाज अंसारी और राखी सरदारिन समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
बुद्ध पूर्णिमा: शांति, करुणा और समरसता का संदेश
नगर परिषद उपाध्यक्ष राणा ओझा ने इस अवसर पर नगरवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व मानवता के लिए आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह दिन भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति का प्रतीक है, जो समस्त विश्व को सत्य, शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है।
निभा देवी का प्रेरणादायक और विस्तृत संदेश
वार्ड पार्षद निभा देवी ने अपने संबोधन में भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज के समय में जब समाज कई प्रकार की चुनौतियों और तनावों से गुजर रहा है, तब भगवान बुद्ध की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध का जीवन हमें यह सिखाता है कि सत्य, अहिंसा, करुणा और संयम के मार्ग पर चलकर ही हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के माध्यम से यह संदेश दिया कि मनुष्य को अपने भीतर झांकना चाहिए, अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उनके अनुसार, क्रोध, लोभ और मोह जैसी नकारात्मक भावनाएं ही समाज में अशांति और विभाजन का कारण बनती हैं, जबकि प्रेम, दया और सहानुभूति से ही समाज में समरसता स्थापित होती है।
निभा देवी ने जोर देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को विशेष रूप से भगवान बुद्ध के विचारों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि वे अपने जीवन में सही दिशा चुन सकें और समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि बुद्ध का मध्यम मार्ग (Middle Path) हमें जीवन में संतुलन बनाए रखने की सीख देता है, जिससे व्यक्ति न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करता है, बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी बनता है।
उन्होंने अंत में कहा कि भगवान बुद्ध का अमूल्य ज्ञान और उनके आदर्श आने वाले युगों तक मानवता को दिशा देते रहेंगे, और हमें चाहिए कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर शांति, प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा दें।
👥 स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी
इस आयोजन में हिसाबी राय, सुशील साहा, रूपेश राम, मुरारी मंडल, टोनी मंडल, मनोरमा देवी, सुरेश शर्मा, पूर्णेन्दु शेखर गांगुली, सानू रजक, जितेश रजक, राजू राय, रणजीत राम, राजू राम, कन्हैया रजक, मिथुन यादव, शुभंकर कुमार, मिथिलेश मंडल, गुलशन चौधरी और शांति रजक सहित दर्जनों मोहल्लेवासी उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
🌺 धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना आयोजन
समूचा कार्यक्रम धार्मिक एकता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि भगवान बुद्ध के सिद्धांत आज भी समाज को जोड़ने और एक सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
✨ इस प्रकार बुद्ध पूर्णिमा का यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव के रूप में, बल्कि समाज को शांति, प्रेम और एकता का संदेश देने वाले एक प्रेरणादायक अवसर के रूप में भी याद किया जाएगा।


