Monday, August 31, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

रेलवे मैदान में गूंजे जोश के स्मैश, जुनून की सर्विस और जीत के जज़्बात—डे बोर्डिंग-1 ने रचा वॉलीबॉल का विजयी अध्याय

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पाकुड़। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर शनिवार को पाकुड़ का रेलवे मैदान सिर्फ एक खेल मैदान नहीं, बल्कि जोश, जुनून, संघर्ष और खेल भावना की जीवंत तस्वीर बन गया। आसमान के नीचे सजा वॉलीबॉल का मैदान, नेट के दोनों ओर खड़ीं जुझारू टीमें और हर अंक के साथ गूंजती दर्शकों की तालियां—मानो गेंद के साथ खिलाड़ियों के सपने भी हवा में उड़ रहे हों।

जिला प्रशासन (खेल कार्यालय), पाकुड़ एवं जिला वॉलीबॉल संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता में जिले की छह टीमों ने हिस्सा लिया। सुबह से शुरू हुआ मुकाबलों का सिलसिला जैसे-जैसे आगे बढ़ा, रेलवे मैदान का रोमांच भी परवान चढ़ता गया। कभी जोरदार सर्विस ने विपक्षी खेमे को चौंकाया तो कभी हवा को चीरता स्मैश सीधे अंक में तब्दील हुआ। हर डिफेंस के पीछे मेहनत थी और हर प्वाइंट के पीछे जीत की भूख।

मैदान में उतरीं टीमें, बढ़ता गया रोमांच

प्रतियोगिता का विधिवत उद्घाटन पाकुड़ नगर परिषद की वार्ड पार्षद निभा देवी, ईआरएमयू के सचिव संजय कुमार ओझा, ईजरप्पा के सचिव राणा शुक्ला तथा जिला वॉलीबॉल संघ के सचिव हिसाबी राय ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर हाथ मिलाया और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्साहित किया।

उद्घाटन के दौरान खिलाड़ियों की आंखों में आत्मविश्वास था और चेहरों पर जीत की चमक। मगर मैदान यह जानता था कि ट्रॉफी तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होने वाला।

राष्ट्रीय खेल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अतिथियों ने खिलाड़ियों को खेल भावना के साथ प्रदर्शन करने और खेल को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद जैसे ही रेफरी की सीटी बजी, मैदान का माहौल पूरी तरह बदल गया। दर्शकों की निगाहें नेट पर टिक गईं और गेंद हवा में उछलते ही मुकाबलों की कहानी शुरू हो गई।

एक-एक अंक के लिए भिड़ीं टीमें

पहले मुकाबले में राज हाई स्कूल और हरिणडंगा हाई स्कूल की टीमें आमने-सामने थीं। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने पूरे जोश के साथ खेल का प्रदर्शन किया। गेंद कभी इस पाले में जाती तो कभी उस पाले में। हर अंक के साथ मुकाबले की धड़कन तेज होती गई। अंततः राज हाई स्कूल ने 2-1 से मुकाबला अपने नाम कर अगले चरण में जगह बनाई।

दूसरे मुकाबले में डे बोर्डिंग-1 और अंजना की टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। दोनों ओर से शानदार सर्विस और आक्रामक स्मैश का सिलसिला चला। कोई भी टीम आसानी से हार मानने को तैयार नहीं थी। निर्णायक क्षणों में धैर्य और बेहतर तालमेल का परिचय देते हुए डे बोर्डिंग-1 ने अंजना को 2-1 से शिकस्त दी।

इसके बाद डे बोर्डिंग-2 और बैंक कॉलोनी के बीच मुकाबला हुआ। इस मैच में भी खिलाड़ियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मैदान पर हर गेंद के लिए संघर्ष हुआ और अंततः डे बोर्डिंग-2 ने जीत दर्ज कर अगले चरण में प्रवेश किया।

मैच दर मैच प्रतियोगिता का रोमांच बढ़ता गया। जो टीमें मैदान में उतरी थीं, उनके लिए यह सिर्फ जीत की लड़ाई नहीं थी; यह अपने अभ्यास, अनुशासन और महीनों की मेहनत को साबित करने का अवसर भी था।

फाइनल में आमने-सामने आया डे बोर्डिंग-1 और डे बोर्डिंग-2

दिन ढलने के साथ प्रतियोगिता अपने सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंची। अब मैदान में सिर्फ दो टीमें थीं—डे बोर्डिंग-1 और डे बोर्डिंग-2। एक ओर जीत की दहलीज पर खड़ी उम्मीदें थीं तो दूसरी ओर ट्रॉफी को अपने नाम करने का संकल्प।

फाइनल शुरू होते ही रेलवे मैदान तालियों और उत्साह से गूंज उठा। खिलाड़ियों की निगाहें गेंद पर थीं और दर्शकों की निगाहें खिलाड़ियों पर। एक तरफ जोरदार सर्विस, दूसरी तरफ चुस्त डिफेंस। गेंद नेट के ऊपर से गुजरती और कुछ ही क्षणों में पूरा मैदान तालियों से भर उठता।

कभी डे बोर्डिंग-1 बढ़त बनाती तो अगले ही पल डे बोर्डिंग-2 शानदार वापसी करती। खिलाड़ियों के बीच तालमेल, एक-दूसरे को लगातार प्रोत्साहित करने का जज़्बा और हर अंक के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष—फाइनल ने खेल भावना की खूबसूरत तस्वीर पेश की।

निर्णायक क्षणों में डे बोर्डिंग-1 के खिलाड़ियों ने अपने संयम, सामूहिक रणनीति और शानदार टीमवर्क का परिचय दिया। अंततः संघर्षपूर्ण मुकाबले में डे बोर्डिंग-1 ने डे बोर्डिंग-2 को 2-1 से पराजित कर विजेता ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

ट्रॉफी जीतने के बाद खिलाड़ियों के चेहरों पर खुशी थी, लेकिन उस खुशी में अपने साथियों के संघर्ष की चमक भी शामिल थी। दूसरी ओर उपविजेता टीम के खिलाड़ियों के चेहरे पर मायूसी जरूर थी, मगर सिर झुका नहीं था—क्योंकि खेल हार और जीत से कहीं बड़ा होता है।

खेल ने सिखाया—जीत से ज्यादा जरूरी संघर्ष

फाइनल मुकाबले के दौरान जिला क्रीड़ा पदाधिकारी राहुल कौशिक, नगर परिषद उपाध्यक्ष राणा ओझा, वार्ड पार्षद निभा देवी, संजय कुमार ओझा, विपिन कुमार चौधरी, जिला वॉलीबॉल संघ के सचिव हिसाबी राय, खेल प्रशिक्षक उजय राय सहित अन्य खेल प्रेमी मौजूद रहे और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहे।

प्रतियोगिता के निर्णायक निर्भय सिंह, अभिषेक भगत और रातुल दे को जिला क्रीड़ा पदाधिकारी की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर नगर परिषद उपाध्यक्ष राणा ओझा ने कहा कि खेल केवल जीत और हार का माध्यम नहीं है, बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आपसी सौहार्द का मजबूत आधार है। उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग लेने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

जिला क्रीड़ा पदाधिकारी राहुल कौशिक ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल जीवन में संघर्ष करना, धैर्य बनाए रखना तथा सफलता और असफलता को समान भाव से स्वीकार करना सिखाता है। सच्चा खिलाड़ी वही है, जो जीत के समय विनम्र रहे और हार के बाद उससे सीख लेकर और अधिक मेहनत करने के लिए तैयार हो।

ट्रॉफी उठी तो तालियों से गूंज उठा मैदान

प्रतियोगिता के समापन पर अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। जैसे ही डे बोर्डिंग-1 के खिलाड़ियों ने विजेता ट्रॉफी थामी, रेलवे मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

लेकिन इस दिन की असली जीत केवल ट्रॉफी की नहीं थी। जीत उस खेल भावना की थी, जिसने खिलाड़ियों को आखिरी गेंद तक लड़ना सिखाया। जीत उस अनुशासन की थी, जिसने मैदान पर प्रतिस्पर्धा को गरिमा दी। जीत उस टीम भावना की थी, जिसमें एक खिलाड़ी की सफलता पूरी टीम की खुशी बन गई।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर पाकुड़ के रेलवे मैदान में वॉलीबॉल की यह प्रतियोगिता मानो यही संदेश छोड़ गई—मैदान में जीतने वाला खिलाड़ी ट्रॉफी उठाता है, लेकिन खेल की भावना को दिल में उतार लेने वाला खिलाड़ी जीवन की असली बाजी जीतता है।

प्रतियोगिता के सफल आयोजन से जिले के खेल प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला। खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों ने भविष्य में भी ऐसी प्रतियोगिताओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता जताई, ताकि पाकुड़ की खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने के लिए लगातार बेहतर मंच मिल सके।

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