📌 न्याय सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर में 25 अप्रैल को न्याय व्यवस्था को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से मासिक लोक अदालत का भव्य और सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन झालसा रांची के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रभारी सचिव विशाल मांझी की देखरेख में किया गया, जिनके मार्गदर्शन में यह आयोजन प्रभावी रूप से संपन्न हुआ।
⚖️ आठ बेंचों का गठन, 108 मामलों का निष्पादन
इस मासिक लोक अदालत के तहत कुल आठ बेंचों का गठन किया गया, जिनमें विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की गई। इस दौरान कुल 108 (एक सौ आठ) वादों का निष्पादन किया गया, जो न्यायिक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इन मामलों में आपसी सहमति के आधार पर समझौते कराए गए, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में कमी आई।
💰 11 लाख से अधिक की राशि पर हुआ समझौता
लोक अदालत के माध्यम से न केवल मामलों का त्वरित निष्पादन हुआ, बल्कि आर्थिक मामलों में भी बड़ी सफलता मिली। कुल 11 लाख 50 हजार 700 रुपए की राशि पर समझौता कराया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोक अदालत के जरिए आर्थिक विवादों को सुलझाने में भी बड़ी सफलता हासिल की जा रही है।
🏦 एनआई एक्ट (चेक बाउंस) मामलों में विशेष लोक अदालत की भूमिका
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसके साथ ही एनआई एक्ट (चेक बाउंस) से संबंधित मामलों के लिए एक विशेष लोक अदालत का भी आयोजन किया गया। इस विशेष पहल के तहत कुल 8 मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें लगभग 8 लाख 95 हजार रुपए की राशि पर आपसी समझौता कराया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि चेक बाउंस जैसे संवेदनशील मामलों को भी सुलझाने में लोक अदालत प्रभावी साबित हो रही है।
👨⚖️ अधिकारियों और अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारियों के साथ-साथ इंश्योरेंस कंपनियों के अधिवक्तागण, विभिन्न बैंकों के अधिकारी, तथा वादी-प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर मामलों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। यह सहभागिता न्याय प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता को और मजबूत करती है।
📊 लोक अदालत: त्वरित और सुलभ न्याय का माध्यम
लोक अदालत का उद्देश्य आम जनता को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करना है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल न्यायालयों का भार कम होता है, बल्कि आम लोगों को भी लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है। पाकुड़ में आयोजित यह लोक अदालत इसी दिशा में एक सराहनीय और सफल प्रयास साबित हुआ।


