Saturday, August 1, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

डॉक्टर ने कहा—’रक्त मिलेगा तभी बचेगी जान’… यह सुनते ही 37वीं बार रक्तदान करने पहुंच गया यह शख्स!

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पाकुड़। इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान तब होती है, जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के किसी अनजान जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए आगे आता है। पाकुड़ में एक बार फिर ऐसा ही प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां इंसानियत फाउंडेशन के सलाहकार नुरुज जमान ने मानव सेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने यह साबित कर दिया कि रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि किसी के जीवन को नया अवसर देने का माध्यम भी है। उन्होंने 37वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान कर एक जरूरतमंद महिला की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉक्टर ने कहा—रक्त की तत्काल जरूरत है

जानकारी के अनुसार रनडंगा निवासी 30 वर्षीय मशरूरा बीबी इन दिनों सदर अस्पताल, सोनाजोड़ी में इलाजरत हैं। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए तत्काल रक्त चढ़ाना आवश्यक है। चिकित्सकों का स्पष्ट कहना था कि समय पर रक्त उपलब्ध होने के बाद ही आगे का उपचार प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

जैसे ही यह सूचना सामने आई कि मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता है, उसके परिजनों की चिंता बढ़ गई। ऐसे समय में इंसानियत फाउंडेशन के सलाहकार नुरुज जमान को इसकी जानकारी दी गई।

सूचना मिलते ही बिना देर किए पहुंचे ब्लड बैंक

जरूरतमंद मरीज की स्थिति के बारे में पता चलते ही नुरुज जमान ने एक पल की भी देरी नहीं की। वे तुरंत पाकुड़ ब्लड बैंक पहुंचे और आवश्यक चिकित्सीय जांच पूरी होने के बाद दुर्लभ (रेयर) रक्त समूह का 37वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान किया।

उनके रक्तदान के बाद मरीज के इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। समय पर उपलब्ध कराए गए रक्त ने मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और परिजनों को बड़ी राहत मिली।

37वीं बार रक्तदान, सेवा का बना प्रेरणादायक सफर

नुरुज जमान का यह पहला रक्तदान नहीं था। वे इससे पहले भी 36 बार स्वेच्छा से रक्तदान कर अनेक जरूरतमंद मरीजों की मदद कर चुके हैं। अब 37वीं बार रक्तदान कर उन्होंने समाज के सामने यह संदेश दिया है कि यदि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करे, तो किसी भी मरीज को केवल रक्त की कमी के कारण परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

समाज में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं, जो बिना किसी पहचान या रिश्ते के केवल मानवता के नाते दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। नुरुज जमान का यह कार्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

रक्तदान क्यों है सबसे बड़ा महादान?

विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान ऐसा दान है जिसे विज्ञान आज भी कृत्रिम रूप से तैयार नहीं कर पाया है। किसी भी मरीज को आवश्यकता पड़ने पर केवल एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त ही उसके उपचार में उपयोग किया जा सकता है।

रक्तदान के अनेक महत्वपूर्ण लाभ हैं—

  • एक यूनिट रक्त कई मरीजों के उपचार में सहायक हो सकता है।
  • रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही सप्ताह में नई रक्त कोशिकाएं बना लेता है।
  • रक्तदान से पहले रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच होती है, जिससे स्वास्थ्य की जानकारी भी मिलती है।
  • रक्तदान करने से मानसिक संतोष मिलता है, क्योंकि किसी की जिंदगी बचाने का अवसर हर किसी को नहीं मिलता।
  • नियमित स्वैच्छिक रक्तदान से अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता बनी रहती है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर उपचार मिल पाता है।

मानवता की सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य

इंसानियत फाउंडेशन लंबे समय से जिले में रक्तदान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था के सदस्य जरूरतमंद मरीजों के लिए दिन-रात उपलब्ध रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं रक्तदान करने के साथ-साथ अन्य रक्तदाताओं को भी प्रेरित करते हैं।

नुरुज जमान का कहना है कि यदि उनका रक्त किसी की जिंदगी बचाने में काम आता है, तो इससे बड़ी खुशी उनके लिए कोई नहीं हो सकती। उनका मानना है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य भी है।

मौके पर मौजूद रहे संस्था के पदाधिकारी

रक्तदान के दौरान इंसानियत फाउंडेशन के सचिव बानिज शेख, कर्मचारी नवीन एवं पियूष दास भी मौजूद रहे। सभी ने नुरुज जमान के इस प्रेरणादायक कदम की सराहना करते हुए लोगों से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं, प्रसव, गंभीर बीमारियों और बड़े ऑपरेशन के दौरान अक्सर मरीजों को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे समय में यदि पर्याप्त संख्या में स्वैच्छिक रक्तदाता उपलब्ध हों, तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

समाज के लिए एक प्रेरक संदेश

आज के समय में, जब अधिकांश लोग अपने व्यस्त जीवन में केवल अपने बारे में सोचते हैं, ऐसे में नुरुज जमान जैसे लोग यह साबित करते हैं कि मानवता अभी भी जीवित है। उनका 37वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान करना केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उन अनगिनत परिवारों की उम्मीद का प्रतीक है, जिनके अपने समय पर रक्त मिलने से नई जिंदगी पा सके।

यह घटना समाज के प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को यह संदेश देती है कि रक्तदान सुरक्षित है, सरल है और किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। यदि अधिक से अधिक लोग नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं, तो अस्पतालों में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

नुरुज जमान का यह प्रेरणादायक कदम न केवल पाकुड़, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। यह संदेश देता है कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है—समय पर किसी की मदद करना, क्योंकि आपका एक यूनिट रक्त किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।

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