📌 सूचना के अधिकार के तहत उठे गंभीर सवाल
पाकुड़। नगर परिषद पाकुड़ की अध्यक्ष को सरकारी वाहन उपलब्ध कराए जाने के मामले ने अब कानूनी और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे पर पाकुड़ सिविल कोर्ट के अधिवक्ता विश्वजीत मिश्रा ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से विस्तृत जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सरकारी वाहन उपलब्ध कराया गया है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस अधिनियम, नियम, सरकारी संकल्प अथवा वैधानिक प्रावधान के तहत दिया गया है।
⚖️ सरकारी संकल्प का हवाला देकर उठाए सवाल
अधिवक्ता विश्वजीत मिश्रा ने अपने आवेदन में झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग के संकल्प पत्रांक संख्या 5/नवि/विविध/105/09-2647, दिनांक 23 अक्टूबर 2009 का उल्लेख किया है। उनके अनुसार इस सरकारी संकल्प के माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मासिक मानदेय का निर्धारण किया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि उक्त संकल्प में मानदेय के अतिरिक्त अन्य किसी प्रकार की सुविधा प्रदान करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में यदि नगर परिषद अध्यक्ष को सरकारी वाहन उपलब्ध कराया गया है, तो उसके पीछे का कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है।
🚗 किस कानून के तहत मिला सरकारी वाहन? मांगा स्पष्ट जवाब
सूचना आवेदन में अधिवक्ता ने नगर परिषद प्रशासन से पूछा है कि नगर परिषद अध्यक्ष को सरकारी वाहन किस अधिनियम, नियम, शासनादेश, सरकारी संकल्प या अन्य वैधानिक प्रावधान के तहत आवंटित किया गया है।
इसके साथ ही उन्होंने वाहन आवंटन से संबंधित आदेश, स्वीकृति पत्र, अनुमोदन आदेश अथवा अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति भी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन आवंटन पूरी तरह नियमों के अनुरूप किया गया है या नहीं।
📄 स्वीकृति देने वाले अधिकारी और फाइल संख्या की भी मांग
अधिवक्ता ने अपने आवेदन में केवल वाहन आवंटन का आधार ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे प्रशासनिक रिकॉर्ड की भी जानकारी मांगी है। उन्होंने पूछा है कि वाहन आवंटन की स्वीकृति किस तिथि को दी गई, यह स्वीकृति किस सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदान की गई तथा उस अधिकारी का नाम एवं पद क्या है।
इसके अलावा संबंधित पत्रांक, फाइल संख्या और वाहन आवंटन से जुड़े सभी प्रशासनिक अभिलेखों की जानकारी भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
❓यदि कोई नियम नहीं है तो वाहन किस आधार पर आवंटित किया गया?
सूचना आवेदन में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठाया गया है कि यदि किसी अधिनियम, नियम, शासनादेश अथवा वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत वाहन आवंटित नहीं किया गया है, तो फिर नगर परिषद अध्यक्ष को सरकारी वाहन उपलब्ध कराने का विधिक आधार क्या है।
अधिवक्ता का कहना है कि यदि सरकारी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, तो उसका स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए और उसकी जानकारी आम नागरिकों के लिए भी उपलब्ध होनी चाहिए।
💰 वाहन के खर्च का पैसा किस बजट मद से हो रहा खर्च?
अपने आवेदन में अधिवक्ता ने वाहन के संचालन और रख-रखाव पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर भी विस्तृत जानकारी मांगी है। उन्होंने पूछा है कि यदि वाहन वास्तव में नगर परिषद अध्यक्ष को आवंटित किया गया है, तो उसके ईंधन, मरम्मत, रख-रखाव, बीमा तथा अन्य संचालन संबंधी खर्च किस बजट मद से वहन किए जा रहे हैं।
इसके अलावा इन खर्चों के लिए स्वीकृत राशि और वित्तीय प्रावधान की जानकारी भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
👨✈️ चालक के वेतन और मानदेय की भी मांगी जानकारी
आवेदन में यह सवाल भी शामिल किया गया है कि सरकारी वाहन के साथ कार्यरत वाहन चालक का वेतन, मानदेय अथवा अन्य वित्तीय भुगतान किस बजट मद से किया जा रहा है। यदि चालक की नियुक्ति की गई है तो उसके भुगतान से संबंधित प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
📢 पारदर्शिता और जवाबदेही पर केंद्रित है पूरा मामला
इस पूरे मामले को लेकर अधिवक्ता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अतिरिक्त सरकारी सुविधा प्रदान की जाती है, तो उसका स्पष्ट वैधानिक और प्रशासनिक आधार सार्वजनिक होना चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर परिषद, पाकुड़ इस आवेदन के जवाब में क्या जानकारी उपलब्ध कराती है और सरकारी वाहन आवंटन के संबंध में कौन-कौन से दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं। ऐसे में इस मामले पर प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी नजर बनी हुई है।


