पाकुड़। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर युवाओं को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ माता-पिता को बच्चों की परवरिश और सकारात्मक संवाद का महत्व समझाने के उद्देश्य से पाकुड़ पॉलिटेक्निक में एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डालसा की सचिव रूपा बंदना किरो की उपस्थिति में युवाओं को कानून की जानकारी देने के साथ उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव का वाहक बनने के लिए प्रेरित किया गया।
युवाओं को बताया—अधिकार जानना भी जरूरी
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा किसी भी समाज और देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उनमें ऊर्जा, प्रतिभा, नई सोच और बदलाव की क्षमता होती है। यदि युवाओं को उनके अधिकारों और कानूनी जिम्मेदारियों की सही जानकारी हो, तो वे एक न्यायपूर्ण और सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने युवाओं को निःशुल्क कानूनी परामर्श, लोक अदालत के महत्व और डालसा की ओर से जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता एवं अधिवक्ता की सुविधा के बारे में जानकारी दी। महिला सुरक्षा और युवा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें और समाज में किसी भी प्रकार के अन्याय या शोषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।
DSP ने कहा—युवा देश के भविष्य
कार्यक्रम में डीएसपी मुख्यालय उज्ज्वल कुमार साहा ने भी युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने युवा अवस्था के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवा देश के भविष्य होते हैं। उनमें नई ऊर्जा, नए विचार, उत्साह और रचनात्मकता होती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की सकारात्मक सोच और रचनात्मक क्षमता का उपयोग समाज और देश के विकास में किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।
पॉक्सो एक्ट से लेकर महिला और बाल सुरक्षा तक की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सहायक गंगाराम टुडू एवं अज़फर हुसैन विश्वास ने संयुक्त रूप से विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने महिला सुरक्षा, बाल सुरक्षा और बच्चों से जुड़े कानूनों के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया।
विशेष रूप से पॉक्सो एक्ट से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी साझा की गई। युवाओं को बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार के शोषण या अपराध की स्थिति में कानून की मदद कैसे ली जा सकती है, इस बारे में भी जानकारी दी गई।
‘दो गुब्बारों’ की कहानी ने समझाया बच्चों के मन का राज
कार्यक्रम का सबसे रोचक और सीख देने वाला हिस्सा रहा पेरेंटिंग सेशन, जिसमें पीसीआई-यूनिसेफ के जिला कार्यक्रम समन्वयक मो. अनीश अंसारी ने ‘दो गुब्बारों की सीख’ के माध्यम से माता-पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक संवाद का महत्व समझाया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि बच्चे के मन में लगातार नकारात्मक बातें, गलत व्यवहार और बुरे अनुभव भरे जाएं, तो उसका असर उसके व्यक्तित्व और व्यवहार पर दिखाई देने लगता है। इसके विपरीत यदि बच्चे के भीतर प्यार, अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच, शिक्षा, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित की जाए, तो उसका परिणाम भी सकारात्मक रूप में सामने आता है।
इसे समझाने के लिए दो गुब्बारों का उदाहरण दिया गया। बताया गया कि जब एक गुब्बारा ऐसी जगह फूटा जहां गंदगी और दुर्गंध थी, तो लोग नाक बंद कर वहां से निकल गए और नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। वहीं दूसरे स्थान पर गुब्बारा फूटने पर खुशबू और अच्छी चीजें लोगों तक पहुंचीं, जिससे लोगों का व्यवहार भी सकारात्मक रहा।
इस उदाहरण के माध्यम से समझाया गया कि बच्चों के मन में जो विचार और संस्कार डाले जाते हैं, वही आगे चलकर उनके व्यवहार और व्यक्तित्व में दिखाई देते हैं।
डांटने से ज्यादा जरूरी है बच्चों को समझना
पेरेंटिंग सेशन में माता-पिता को सलाह दी गई कि बच्चों को केवल डांटने या नियंत्रित करने के बजाय उनकी बात को ध्यान से सुना जाए। बच्चों के साथ विश्वास और संवाद का रिश्ता मजबूत किया जाए, ताकि वे अपनी परेशानियां बिना डर के माता-पिता से साझा कर सकें।
कार्यक्रम में यह संदेश विशेष रूप से दिया गया कि परिवार का सकारात्मक माहौल बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। माता-पिता यदि बच्चों के विचारों को समझने और उन्हें सही दिशा देने का प्रयास करें, तो बच्चे अधिक आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलने की अपील
पाकुड़ पॉलिटेक्निक की प्रिंसिपल डॉ. सुषमा यादव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का पालन करने, कड़ी मेहनत करने और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव तैयार कर सकती है। इसके लिए शिक्षा, अनुशासन, सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की भावना आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड.एच. विश्वास ने किया। मौके पर पाकुड़ पॉलिटेक्निक के शिक्षक-शिक्षिकाएं, सोशल वर्कर नासीरूद्दीन शेख, फजर शेख, आलियारा खातून, बीवीजान, हाजरा बीवी, विद्यार्थी नेहा कुमारी, पायल कुमारी, आयेशा खातून, रेशमा खातून, नूरजहां खातून, पारा लीगल वॉलंटियर नीरज कुमार राउत सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को कानून के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ परिवार और समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश भी दे गया। एक ओर युवाओं को उनके अधिकारों की जानकारी मिली, तो दूसरी ओर ‘दो गुब्बारों’ की कहानी ने यह समझाया कि बच्चों के मन में आज जो भरा जाएगा, वही कल उनके व्यक्तित्व के रूप में सामने आएगा।


