पाकुड़। रेलवे मैदान पाकुड़ में आयोजित 28वें गणपति महोत्सव का दूसरा दिन भक्ति, संगीत, नृत्य और उत्साह के ऐसे रंगों से सजा, जिसमें बारिश भी श्रद्धा और उमंग के आगे फीकी पड़ती नजर आई। संध्या बेला में जब बाबा गणेश की भव्य महाआरती शुरू हुई तो पूरा वातावरण आस्था की रोशनी में नहा उठा। आरती की लौ के साथ उठती श्रद्धा और चारों ओर गूंजता “गणपति बप्पा मोरया” का जयघोष मानो पूरे स्टेशन परिसर को भक्ति के एक विशाल आंगन में बदल रहा था।
महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भक्तों ने विघ्नहर्ता गणेश के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। घंटियों की ध्वनि, आरती के स्वर और श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस हुई, मानो कुछ क्षणों के लिए समय भी ठहरकर इस भक्ति को निहार रहा हो।
बारिश आई, मगर जुनून नहीं थमा
महोत्सव के दूसरे दिन धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रही। भारी बारिश के बीच आयोजित फाइनल नृत्य प्रतियोगिता ने पूरे माहौल को एक अलग ही रंग दे दिया। बारिश की बूंदें लगातार बरसती रहीं, लेकिन मंच पर प्रतिभागियों का उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ।
जूनियर, सीनियर और ड्यूएट वर्ग के चयन राउंड में प्रतिभागियों ने अपने नृत्य कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। मंच पर कभी कदमों की थिरकन ने माहौल में ऊर्जा भरी तो कभी भाव-भंगिमाओं और आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
कोलकाता, मालदा, मुर्शिदाबाद, जंगीपुर, बरहमपुर, रामपुरहाट, साहिबगंज और भागलपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे बच्चों और युवाओं ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। अलग-अलग नृत्य शैलियों में प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि प्रतिभा को मंच मिल जाए तो वह बारिश की बूंदों के बीच भी अपना रंग बिखेर सकती है।
मंच पर थिरकते कदम, सामने उमड़ता उत्साह
बारिश के बावजूद दर्शकों की भीड़ और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। मंच पर जैसे-जैसे प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां आगे बढ़ती गईं, वैसे-वैसे तालियों की गूंज भी तेज होती गई। दर्शकों का उत्साह प्रतिभागियों के लिए किसी अतिरिक्त ऊर्जा से कम नहीं था।
इसी दौरान पाकुड़ विधानसभा के युवा नेता अजहल इस्लाम मंच पर पहुंचे और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने युवा कलाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने और अपनी कला को नए मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया।
रात गहराती गई, लेकिन मंच की रौनक बढ़ती गई
प्रतियोगिता का रोमांच ऐसा रहा कि रात कब गहराती चली गई, इसका एहसास ही नहीं हुआ। कार्यक्रम देर रात करीब 3 बजे तक चलता रहा। आधी रात के बाद भी मंच की रोशनी, संगीत की धुन और दर्शकों की तालियां यह संदेश देती रहीं कि उत्सव की असली रोशनी घड़ी की सुइयों से नहीं, लोगों के उत्साह से तय होती है।
प्रतियोगिता के निर्णायक कोलकाता के उज्ज्वल हालदार एवं शंकरलाल साह ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का बारीकी से मूल्यांकन किया। वहीं मंच का संचालन एवं उद्घोषणा कैलाश मध्यान्ह ने किया।
परिणाम की घड़ी आई तो थम गईं निगाहें

शानदार प्रस्तुतियों के बाद जब निर्णायकों का निर्णय सामने आया तो प्रतिभागियों और दर्शकों में उत्सुकता और बढ़ गई। हर किसी की निगाह इस बात पर टिकी थी कि आखिर किस कलाकार और किस समूह ने बाजी मारी।
ग्रुप डांस के फाइनल में प्रथम स्थान स्ट्रीट डांस ग्रुप, द्वितीय स्थान विंग्स डांस ग्रुप और तृतीय स्थान एसडीपी क्वींस ने प्राप्त किया।
सीनियर वर्ग में प्रथम स्थान सौम्या सिंह, द्वितीय जाय प्रमाणिक और तृतीय आयन मंडल ने हासिल किया।
वहीं जूनियर वर्ग में प्रथम स्थान आराध्या दास, द्वितीय आशिया खातून और तृतीय स्थान मनीषा सरकार ने प्राप्त किया। नवोदित बाल कलाकारों आध्या एवं अदिति को सांत्वना पुरस्कार देकर उनकी प्रतिभा का उत्साहवर्धन किया गया।

पुरस्कार मिला तो चेहरे पर खिली जीत की रोशनी
मंच पर उपस्थित नगर परिषद की वार्ड पार्षद निभा देवी, कल्याणी गुप्ता, निरीक्षक-सह-थाना प्रभारी अनिल कुमार गुप्ता, अखिलेश कुमार चौबे, संजय कुमार, कुमार विश्वास, अरविंद कुमार राय एवं सनी सुप्रभात ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया।
पुरस्कार मिलने के बाद विजेताओं के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। किसी के लिए यह मेहनत के फल की पहली मिठास थी तो किसी के लिए आगे और बेहतर करने की प्रेरणा। मंच पर उस समय केवल पुरस्कार नहीं बांटे जा रहे थे, बल्कि मेहनत, प्रतिभा और सपनों को सम्मान मिल रहा था।
आयोजन में जुटी रही पूरी टीम

गणपति महोत्सव को सफल बनाने में हिसाबी राय, राणा शुक्ला, अविनाश पंडित, अजीत मंडल, तन्मय पोद्दार, राज चौधरी, अनिकेत गोस्वामी, पिंटू हाजरा, नितिन मंडल, संजय राय, रंजीत राम, रतुल दे, बुबाय रजक, जितेश रजक, मोनी सिंह, अभिषेक कुमार, सादेकुल आलम, अंकित मंडल एवं अंशु अंश राज सहित समिति के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
रेलवे मैदान में चल रहा गणपति महोत्सव धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर संगम बनता जा रहा है। यहां आरती की आध्यात्मिक ध्वनि से लेकर नृत्य के थिरकते कदमों तक, हर रंग उत्सव को जीवंत बना रहा है।
दूसरे दिन की रात भी कुछ ऐसी ही कहानी लिख गई—बारिश बरसती रही, रात गहराती रही, लेकिन गणपति के दरबार में भक्ति और उत्साह की रोशनी कम नहीं हुई। आधी रात के बाद भी तालियों की गूंज और मंच की चमक यह कहती रही कि जब आस्था के साथ कला और उत्साह जुड़ जाए, तो उत्सव सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं रहता, बल्कि यादों में बस जाने वाला अनुभव बन जाता है।


