पाकुड़। नशा सिर्फ शरीर को कमजोर नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, परिवार की खुशियों और समाज के भविष्य को भी अपनी गिरफ्त में लेने लगता है। इसके खिलाफ जागरूकता ही वह पहला कदम है, जो किसी जिंदगी को अंधेरे रास्ते से वापस उजाले की ओर ला सकता है। इसी सोच के साथ झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ की ओर से किताझोर में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में नशे के दुष्परिणामों के साथ लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई।
नशा केवल आदत नहीं, जिंदगी पर पड़ने वाली गहरी चोट
शिविर का उद्देश्य नालसा की ‘डॉन’ योजना के तहत समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में जागरूकता फैलाना तथा ‘संवाद व जागृति’ योजना के माध्यम से आम लोगों तक कानून की जानकारी पहुंचाना रहा।
इस दौरान मो. आलम, जिला को-ऑर्डिनेटर, पीएचडी पाकुड़, किताझोर के वार्ड पार्षद मिथुन मरांडी एवं नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड.एच. विश्वास ने नशे के दुष्परिणामों पर विस्तार से जानकारी दी।
लोगों को बताया गया कि नशे की लत व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नशे से बचाव केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वस्थ परिवार और जागरूक समाज की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
कानून की जानकारी बनी अधिकारों की ढाल
शिविर की खास बात यह रही कि यहां जागरूकता का दायरा केवल नशे के नुकसान तक सीमित नहीं रहा। लोगों को यह भी बताया गया कि कानून की जानकारी व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और जरूरत के समय सही सहायता प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
पैरा लीगल वॉलंटियर्स याकूब अली एवं मोकमाउल शेख ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ की ओर से उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने लोगों को बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से यदि कोई व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त करने में असमर्थ है, तो पात्र लोगों के लिए विधिक सेवा व्यवस्था के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता के लिए नालसा के टोल-फ्री नंबर 15100 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई।
अधिकारों की जानकारी से मजबूत होता है समाज
कानून की किताबें अक्सर अदालतों और न्यायालयों तक सीमित दिखाई देती हैं, लेकिन विधिक जागरूकता शिविरों का उद्देश्य इसी दूरी को कम करना है। जब कानून की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है, तो अधिकार केवल किताब के शब्द नहीं रहते, बल्कि जरूरत के समय सहारा बन सकते हैं।
किताझोर में आयोजित यह शिविर भी इसी प्रयास की एक कड़ी रहा, जहां नशे से बचने का संदेश देने के साथ लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि अपने अधिकारों को जानना भी सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जागरूकता की लौ तभी सार्थक, जब समाज साथ चले
कार्यक्रम में पैरा लीगल वॉलंटियर्स अमूल्य रत्न रविदास, एजारूल शेख, सामाजिक कार्यकर्ता फजर शेख, स्वपन प्रमाणिक, मो. मोताबाबर शेख, हबीबुर शेख, शीला सोरेन, जाकिर हुसैन, इनायतुल शेख, आशिकूल अंसारी सहित क्षेत्र के कई लोग मौजूद रहे।
नशे के खिलाफ चेतना और कानूनी अधिकारों की जानकारी से जुड़ा यह आयोजन एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गया—किसी समाज को मजबूत बनाने के लिए केवल कानून बनना पर्याप्त नहीं, बल्कि लोगों का अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना भी जरूरी है।
किताझोर में उठी यह जागरूकता की आवाज इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ी कि नशे की गिरफ्त कमजोर हो, कानून की समझ मजबूत हो और जरूरत पड़ने पर हर व्यक्ति तक न्याय और सहायता का रास्ता पहुंच सके।


