शब्दों में सपने, रंगों में समाज की तस्वीर
पाकुड़। सेवा संकल्प अभियान के तहत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बलिहारपुर के परिसर में आयोजित भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता ने विद्यालय को महज प्रतियोगिता का मंच नहीं रहने दिया, बल्कि उसे नई पीढ़ी के विचारों और सपनों का आईना बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने शब्दों और रंगों के माध्यम से समाज, विकास और जनकल्याण से जुड़े विषयों को अपनी दृष्टि से सामने रखा।
जब बच्चों की आवाज में दिखा बदलते भारत का सपना
भाषण प्रतियोगिता में दस विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। किसी की आवाज में बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा की चिंता थी तो किसी के शब्दों में तकनीक के बदलते दौर की तस्वीर। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री जनधन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसे विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों ने सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और तकनीकी विकास जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।
इन विषयों का चयन अपने आप में यह संकेत देता रहा कि आज की नई पीढ़ी के लिए विकास केवल किताबों में पढ़ा जाने वाला शब्द नहीं, बल्कि समाज और परिवार के जीवन से जुड़ा हुआ अनुभव भी है।
राजनीतिक योजनाओं से सामाजिक सरोकार तक
कार्यक्रम का आयोजन राजनीतिक संगठन से जुड़े सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हुआ, लेकिन प्रतियोगिता का मंच विद्यार्थियों के लिए सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखने का माध्यम बना। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास से जुड़े विषयों को बच्चों ने अपने नजरिए से प्रस्तुत किया। इस तरह कार्यक्रम में राजनीतिक पहलू के साथ शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी का पक्ष भी सामने आया।
बच्चों की प्रस्तुतियों में यह संदेश दिखाई दिया कि लोकतांत्रिक समाज में नीतियों और योजनाओं की चर्चा केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहती। जब वही विषय विद्यालय की कक्षा और प्रतियोगिता के मंच तक पहुंचते हैं, तो नई पीढ़ी उन्हें अपनी भाषा और कल्पना में समझने की कोशिश करती है।
भाषण में पलक की पहली आवाज
भाषण प्रतियोगिता में कक्षा आठवीं की पलक कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी कक्षा के आयुष आनंद ने द्वितीय तथा कक्षा दसवीं के शंकर सरकार ने तृतीय स्थान हासिल किया। राजवी सिंह, अनन्या मिश्रा, साक्षी राय, पूर्णिमा घोष, चंद्रमा मंडल, अनामिका मिश्रा और अंकित यादव ने भी प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
इन विद्यार्थियों के लिए यह केवल पुरस्कार पाने की प्रतिस्पर्धा नहीं थी, बल्कि अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने और दूसरों के सामने अपनी बात रखने का अवसर भी था।
कैनवास पर उभरा समाज का आईना
चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों की कल्पना ने रंगों का रूप लेकर समाज के सामने कई जरूरी सवाल रखे। वृक्षारोपण, स्वच्छ भारत, रक्तदान और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को विद्यार्थियों ने अपनी कूची और रंगों के माध्यम से जीवंत किया।
कागज पर बने इन चित्रों में कहीं पर्यावरण की चिंता थी, कहीं स्वच्छता का संदेश और कहीं रक्तदान के जरिए मानव जीवन बचाने की भावना। रंग भले बच्चों के हाथों से निकले थे, लेकिन उनके भीतर छिपा संदेश पूरे समाज के लिए था।
रंगों से निकली जिम्मेदारी की पुकार
चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा आठवीं के सुरोजित मंडल ने प्रथम, कक्षा छठी के राजदीप मंडल ने द्वितीय तथा कक्षा नौवीं की अदिति कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं विद्यालय के आचार्यगण ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
सम्मान के उस क्षण में बच्चों के चेहरों पर खुशी थी, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण वह विश्वास था, जो किसी बच्चे के भीतर तब जन्म लेता है जब उसके विचारों और रचनात्मकता को समाज के सामने सम्मान मिलता है।
प्रतियोगिता से आगे, नागरिक चेतना की पाठशाला
कार्यक्रम में प्रतियोगिता के संयोजक अनुग्राहित प्रसाद साह, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विवेकानंद तिवारी, जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय, भाजयुमो के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य-सह-वार्ड पार्षद अनिकेत गोस्वामी सहित विद्यालय के आचार्यगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संयोजक अनुग्राहित प्रसाद साह ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभा को सामने आने का अवसर देती हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और सामाजिक विषयों के प्रति जागरूकता विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ रचनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
आज के विद्यार्थी, कल के समाज की आवाज
विद्यालय का यह आयोजन अपने पीछे एक बड़ा सवाल भी छोड़ गया जिस पीढ़ी के हाथों में आज रंग और शब्द हैं, वही हाथ कल समाज और देश की दिशा तय करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
इसलिए बच्चों के मंच से निकली हर बात महज प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं होती। उसमें आने वाले भारत की कल्पना छिपी होती है। पाकुड़ के इस विद्यालय में भी भाषणों की आवाज और चित्रों के रंगों ने यही संकेत दिया कि नई पीढ़ी समाज को केवल देख नहीं रही, बल्कि उसे समझने और अपने तरीके से बदलने के सपने भी देख रही है।


