पाकुड़। कभी समाज की शक्ति बिखरे हुए दीपों की तरह अलग-अलग दिखाई देती है, लेकिन जब वही दीप एक साथ जलते हैं तो उजाले का विस्तार गांव की चौखट से लेकर पूरे समाज तक होने लगता है। पाकुड़ में रविवार को कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब तैलीक समाज के सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी एक मंच पर जुटे और सामाजिक एकता, संगठन के सुदृढ़ीकरण तथा समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया। सहरकौल स्थित डॉ. अनोज के क्लिनिक परिसर में आयोजित पाकुड़ जिला तेली समाज की बैठक सह कार्यकर्ता जुटान ने समाज के भीतर नई चेतना और संगठनात्मक ऊर्जा का संदेश दिया।
दीप प्रज्वलन से हुआ नवचेतना के सफर का आगाज
13 सितंबर 2026, रविवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुरूप दीप प्रज्वलित कर किया गया। दीप की लौ मानो उस सामाजिक चेतना का प्रतीक बनी, जिसे समाज के लोगों ने संगठन और एकता के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संयुक्त संचालन राजू नंदन साहा एवं हुकुम चंद ने किया।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने दिखाई संगठन की ताकत
बैठक में समाज के कई प्रबुद्ध, सामाजिक रूप से सक्रिय और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। अनुगृहीत साह, रंजन साहा, डॉ. अनुज साहा, अशोक कुमार साहा, अरविंद गोराई, धनेश्वर साहा, दीपक साहा, कालीचरण साहा, रतन साहा, बानेश्वर साहा, श्रवण साहा, रामकुमार साहा, विश्वनाथ साहा, अरुण साहा, धनंजय साहा, नरेन साहा, अनिल साहा, राजेश साहा, ओमप्रकाश साहा और सहदेव साहा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी जुटे।
सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि समाज अब केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को पहचानने लगा है।
नगर से प्रखंड तक संगठन विस्तार की बनी राह
बैठक में समाज को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। नगर कमिटी की तर्ज पर प्रखंड स्तरीय समिति के गठन का मार्ग प्रशस्त करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य संगठन को केवल जिला या नगर स्तर तक सीमित रखने के बजाय प्रखंड स्तर तक प्रभावी और सक्रिय बनाना है।
प्रस्तावों पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपनी सहमति जताई। इस दौरान यह भावना स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई कि मजबूत समाज की नींव मजबूत संगठन से ही तैयार होती है।
निष्पक्ष चुनाव के लिए पर्यवेक्षक दल का होगा गठन
संगठनात्मक ढांचे को लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी अहम निर्णय लिया गया। बैठक में चुनाव की तिथियां निर्धारित करने तथा जिला स्तर से चुनाव पर्यवेक्षक दल के गठन का निर्णय लिया गया।
समाज के भीतर चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे, इसके लिए पर्यवेक्षक दल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस पहल को संगठन में विश्वास और जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
गांव की चौखट तक पहुंचेगा संगठन, बनेगा VLC
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू संगठन को जिले के अंतिम छोर तक पहुंचाने का संकल्प रहा। पाकुड़ जिले के हर गांव तक संगठन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तरीय संयोजक (VLC) के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया।
VLC के माध्यम से गांव और जिला संगठन के बीच सीधा और पारदर्शी संवाद स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इससे ग्रामीण स्तर की समस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक गतिविधियों को जिला संगठन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
यानी अब संगठन की आवाज केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांव की गलियों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
सामाजिक एकता के साथ सांस्कृतिक विरासत बचाने पर जोर
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत केवल उसकी संख्या में नहीं, बल्कि उसकी एकता, संस्कृति और साझा सामाजिक चेतना में निहित होती है। तैलीक समाज को एक साझा मंच पर लाने और सामाजिक उपेक्षा के खिलाफ सामूहिक आवाज को मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही समाज के सांस्कृतिक उत्थान और पौराणिक विचारधाराओं के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया। उपस्थित लोगों ने माना कि आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक विरासत को बचाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
राजनीति से परे सेवा का संकल्प
बैठक में एक उल्लेखनीय पहल के रूप में गैर-राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य संगठन को व्यापक सामाजिक आधार देना और समाज के गरीब, कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा को प्राथमिकता देना है।
सेवा को सामाजिक संगठन की आत्मा मानते हुए जरूरतमंदों के लिए सहयोग, सहायता और जनकल्याण की भावना से काम करने का संकल्प लिया गया। यह पहल संगठन को केवल सामाजिक पहचान के मंच के बजाय जनसेवा के माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दिसंबर में होगा विशाल जिला स्तरीय महासभा का आयोजन
बैठक में संगठन के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी बड़ी घोषणा की गई। दिसंबर माह में विशाल जिला स्तरीय महासभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
इस महासभा को समाज के व्यापक स्तर पर संवाद, संगठन विस्तार और भविष्य की रणनीति तय करने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। महासभा को सफल बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर 7 सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया है, जो आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं और जिम्मेदारियों का औपचारिक रूप से निर्वहन करेगी।
अधिकार और कर्तव्य की चेतना से मजबूत होगा समाज
पूरी बैठक में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि समाज अब अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सामूहिक शक्ति को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहा है। संगठन को गांव तक ले जाने की पहल, पारदर्शी चुनाव व्यवस्था, सांस्कृतिक संरक्षण और जरूरतमंदों की सेवा जैसे निर्णय इसी बदलती सामाजिक सोच की तस्वीर पेश करते हैं।
यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि उस सामाजिक यात्रा का पड़ाव दिखाई दिया जिसमें बिखरी हुई आवाजों को एक मंच पर लाकर उन्हें सामूहिक शक्ति में बदलने की कोशिश की जा रही है।
अध्यक्षीय संबोधन में एकता का संदेश
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अध्यक्ष श्री कुमार शांतनु जी ने अपने सारगर्भित अध्यक्षीय संबोधन में उपस्थित सदस्यों, कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सामाजिक एकता, संगठन की मजबूती और समाजहित में सक्रिय भागीदारी की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
अध्यक्षीय संबोधन के बाद कार्यक्रम का वातावरण उत्साह और ऊर्जा से भर उठा।
‘जय तेली समाज’ के नारों से गूंजा परिसर
कार्यक्रम के समापन की ओर बढ़ते हुए पूरा परिसर “जय तेली समाज” के नारों से गूंज उठा। नारों में केवल उत्साह नहीं था, बल्कि एक ऐसे समाज की आकांक्षा भी दिखाई दी जो अपनी पहचान, सम्मान और सामूहिक शक्ति को नए सिरे से स्थापित करना चाहता है।
पाकुड़ की यह बैठक इस मायने में महत्वपूर्ण रही कि यहां सामाजिक एकता को केवल विचार के रूप में नहीं, बल्कि गांव से जिला तक संगठन खड़ा करने की ठोस कार्ययोजना के रूप में सामने रखा गया। अब देखना यह होगा कि बैठक में लिए गए संकल्प किस गति से जमीन पर उतरते हैं और तैलीक समाज की यह नई सामाजिक शक्ति आने वाले समय में किस तरह अपना विस्तार करती है।


