Sunday, September 13, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

जब शरीर रक्त बनाना भूल जाए, तब इंसानियत बनती है फरिश्ता – 6 साल की तमन्ना के लिए मोसाराफ ने दिया जिंदगी का अमृत

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पाकुड़। कहते हैं, इंसानियत की कोई जाति, धर्म या सरहद नहीं होती। किसी अनजान की जिंदगी बचाने के लिए जब कोई अपना रक्त देता है, तो वह सिर्फ रक्तदान नहीं करता, बल्कि किसी की सांसों में उम्मीद, किसी परिवार की आंखों में खुशी और किसी मासूम के भविष्य में जिंदगी के रंग भर देता है। पाकुड़ में भी इंसानियत की ऐसी ही एक तस्वीर देखने को मिली, जहां एक रक्तदाता ने थैलेसीमिया से जूझ रही छह वर्षीय मासूम तमन्ना यास्मीन के लिए समय पर रक्तदान कर फरिश्ते का फर्ज निभाया।

चांचकी की रहने वाली छह वर्षीय तमन्ना यास्मीन जन्म से ही थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का शरीर पर्याप्त मात्रा में रक्त बनाने में सक्षम नहीं होता। ऐसे में उनकी जिंदगी नियमित रूप से रक्त चढ़ाए जाने पर निर्भर रहती है। किसी रक्तदाता की नसों से निकला रक्त इन मासूमों के लिए महज रक्त नहीं, बल्कि जीवन की डोर बन जाता है।

तमन्ना के लिए जब ए पॉजिटिव रक्त की जरूरत पड़ी, तब भवानीपुर निवासी मोसाराफ शेख आगे आए। उन्होंने समय की नजाकत को समझते हुए पाकुड़ ब्लड बैंक पहुंचकर ए पॉजिटिव रक्तदान किया। उनके इस छोटे से कदम ने एक मासूम की जिंदगी के लिए बड़ी उम्मीद जगा दी।

रक्तदान के बाद शायद मोसाराफ के हाथों में कुछ देर तक सुई का निशान रहा होगा, लेकिन तमन्ना के परिवार के लिए यह निशान किसी दर्द का नहीं, बल्कि जिंदगी मिलने का निशान था। उनके रक्त की कुछ बूंदें उस मासूम की नसों में पहुंचकर मानो यह संदेश दे रही थीं कि बीमारी चाहे कितनी बड़ी हो, इंसानियत उससे बड़ी है।

जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित करीब 81 बच्चे बताए जाते हैं। इन बच्चों के लिए हर दिन किसी न किसी रक्तदाता की जरूरत होती है। इनके लिए रक्तदान किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि जिंदगी को लगातार चलाए रखने की जरूरत है। जब शरीर रक्त बनाना बंद कर देता है, तब समाज के स्वस्थ लोगों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने रक्त से किसी मासूम की जिंदगी को गति दें।

इस अवसर पर इंसानियत फाउंडेशन के सचिव बानिज शेख, महबूब आलम, वकील हक साहेब, कर्मचारी नवीन कुमार एवं पियूष दास मौजूद रहे। संस्था से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने इस मानवीय पहल को और मजबूती दी।

तमन्ना जैसी मासूम जिंदगियां हमें बार-बार यह याद दिलाती हैं कि जिंदगी की कीमत सिर्फ सांसों में नहीं होती, बल्कि उन हाथों में भी होती है जो किसी जरूरतमंद के लिए आगे बढ़ते हैं। रक्तदान करने वाला व्यक्ति शायद अपने जीवन से कुछ मिनट निकालता है, लेकिन किसी जरूरतमंद के जीवन में वह कई अनमोल पल वापस लौटा सकता है।

मोसाराफ शेख ने रक्तदान कर यह साबित किया कि फरिश्ते हमेशा आसमान से नहीं उतरते। कई बार वे हमारे ही बीच से निकलते हैं, अपनी आस्तीन चढ़ाते हैं, ब्लड बैंक तक पहुंचते हैं और चुपचाप अपना रक्त देकर किसी अनजान की जिंदगी में उजाला भर जाते हैं।

आज तमन्ना को रक्त मिला है, कल किसी और मासूम को जरूरत होगी। सवाल सिर्फ इतना है—क्या उस वक्त हमारे बीच कोई मोसाराफ खड़ा होगा?

क्योंकि थैलेसीमिया से लड़ रहे इन 81 मासूमों के लिए रक्त की हर बूंद एक दुआ है, हर रक्तदाता एक उम्मीद है और हर रक्तदान… जिंदगी का अमृत।

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