Tuesday, May 12, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

पाकुड़ में चला व्यापक विधिक जागरूकता अभियान, जेल से गांवों तक पहुंची कानूनी सहायता की जानकारी

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📍 झालसा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने शुरू किया विशेष जागरूकता अभियान

पाकुड़। जिले में आम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा जरूरतमंद लोगों तक निःशुल्क कानूनी सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान झालसा रांची के निर्देशानुसार आयोजित किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार दिवाकर पांडेय के निर्देश पर किया गया। वहीं अभियान का मार्गदर्शन प्राधिकार की सचिव रूपा बंदना किरो द्वारा किया गया।

इस विशेष अभियान के तहत पाकुड़ जेल सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को कानूनी जानकारी दी गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित कराना रहा।


कैदियों को बताए गए उनके कानूनी अधिकार और जमानत संबंधी प्रावधान

अभियान के दौरान लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख ने पाकुड़ जेल पहुंचकर कैदियों को उनके अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बंदियों को बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को कानून के तहत न्याय पाने और अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर अथवा जरूरतमंद कैदी भी निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि कोई भी व्यक्ति केवल आर्थिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित न रहे।

मो. नुकुमुद्दीन शेख ने कैदियों को जमानत के अधिकार, मुकदमों की प्रक्रिया, कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीके तथा प्राधिकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जेल में बंद व्यक्तियों के मानवाधिकारों की रक्षा करना भी विधिक सेवा प्राधिकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।


ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के खिलाफ चलाया गया विशेष जागरूकता अभियान

वहीं दूसरी ओर प्राधिकार की टीम ने जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर बाल विवाह रोकथाम को लेकर घर-घर जागरूकता अभियान चलाया। ग्रामीणों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया।

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान लोगों को समझाया गया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बालिकाओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है।

ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि कानून के अनुसार लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष तथा लड़कों की उम्र 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके बावजूद बाल विवाह कराना या उसमें सहयोग करना कानूनन अपराध है।


बाल विवाह कराने वालों पर सख्त सजा का प्रावधान

अभियान के दौरान टीम ने ग्रामीणों को यह भी जानकारी दी कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह कराने वाले अभिभावकों, रिश्तेदारों या सहयोग करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

लोगों को समझाया गया कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिलती है तो उसे तुरंत प्रशासन, पुलिस या जिला विधिक सेवा प्राधिकार को सूचित करें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं बल्कि बच्चों के अधिकारों का हनन है। इसे रोकने में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है।


📞 नालसा के टॉल फ्री नंबर 15100 की दी गई जानकारी

जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के टॉल फ्री नंबर 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों और जरूरतमंद लोगों से कहा गया कि यदि उन्हें किसी प्रकार की कानूनी समस्या हो या निःशुल्क कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो वे इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

टीम ने बताया कि यह सेवा गरीब, असहाय, महिलाओं, बच्चों, वृद्धों और जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है।


📄 घर-घर बांटी गई जागरूकता पर्चियां

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए टीम द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता पर्चियां भी वितरित की गईं। इन पर्चियों में कानूनी सहायता, बाल विवाह निषेध कानून, महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों तथा निःशुल्क विधिक सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई थीं।

ग्रामीणों ने भी इस अभियान में रुचि दिखाई और कई लोगों ने कानूनी प्रक्रियाओं तथा सामाजिक मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे, जिनका टीम द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया।


👥 पैनल अधिवक्ता और पैरा लीगल वॉलिंटियर्स ने निभाई अहम भूमिका

इस जागरूकता अभियान को सफल बनाने में प्राधिकार से जुड़े अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलिंटियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मौके पर पैनल अधिवक्ता एल्बिना किस्कू मौजूद रहीं।

इसके अलावा पैरा लीगल वॉलिंटियर्स कान्हु हांसदा, भरत कुमार साहा, जयंती टुडू समेत अन्य स्वयंसेवकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

इन सभी ने ग्रामीणों को यह संदेश दिया कि कानून केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के अधिकारों की रक्षा और न्याय दिलाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

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