पाकुड़। सावन की पवित्रता, बाबा बैद्यनाथ के प्रति आस्था और सेवा की भावना जब एक साथ दिखाई देती है, तो माहौल अपने आप खास बन जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य उस समय देखने को मिला, जब भारत सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ब्याहुत कलवार सेवा समिति के प्रधान कार्यालय द्वारा आयोजित 20वें निःशुल्क कांवरिया सेवा शिविर में पहुंचे। यहां उन्होंने केवल शिविर का निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि खुद कांवरियों की सेवा में जुटकर उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
शिविर में पहुंचने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सेवा समिति की ओर से कांवरियों के लिए की गई विभिन्न व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, विश्राम और अन्य सेवा सुविधाओं की जानकारी ली। विशेष रूप से एसी डोरमेट्री कमरा देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और समिति द्वारा कांवरियों की सुविधा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
अश्विनी चौबे ने शिविर में उपलब्ध सेवा व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि कांवरियों की निःशुल्क सेवा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। उन्होंने ब्याहुत कलवार सेवा समिति की पूरी टीम को इस सेवा कार्य के लिए साधुवाद दिया।
20 साल से जारी सेवा का लिया जायजा
ब्याहुत कलवार सेवा समिति द्वारा आयोजित यह सेवा शिविर अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। लंबे समय से कांवरियों की सेवा में जुटी समिति के इस प्रयास को देखकर अश्विनी चौबे ने टीम की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से समिति के अध्यक्ष एवं भूतपूर्व सैनिक विश्वनाथ भगत, सचिव तारकेश्वर नाथ भगत, कोषाध्यक्ष कैलाश नाथ भगत तथा पूरी टीम के सेवा भाव की प्रशंसा की।
शिविर में कांवरियों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को देखकर उन्होंने कहा कि ऐसी सेवा भावना समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम करती है। धार्मिक यात्रा के दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध कराना अपने आप में पुण्य और सामाजिक सेवा का कार्य है।
फल बांटे और फिर खुद बन गए सेवक
कार्यक्रम के दौरान अश्विनी चौबे ने कांवरियों के बीच फल का वितरण किया। लेकिन इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस दृश्य की हुई, जब उन्होंने स्वयं कांवरियों की सेवा में हाथ बंटाया और मालिश सेवा की। पूर्व केंद्रीय मंत्री को इस तरह श्रद्धालुओं की सेवा करते देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक नजर आए।
उनका यह अंदाज कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आमतौर पर बड़े पदों पर रहे नेताओं को मंच से संबोधित करते हुए देखा जाता है, लेकिन यहां अश्विनी चौबे ने सेवा को केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा और स्वयं सेवा कार्य में शामिल होकर इसका उदाहरण प्रस्तुत किया।
‘वंदे मातरम्’ को हर घर तक पहुंचाने का संदेश
अपने संबोधन में अश्विनी कुमार चौबे ने राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विषयों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के भाव और संदेश को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने और भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में सहयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने बाबा बैद्यनाथ कॉरिडोर के निर्माण की आवश्यकता का भी उल्लेख किया। बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक पर्यटन के विकास के दृष्टिकोण से कॉरिडोर की चर्चा को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
समिति ने किया अतिथियों का सम्मान
इस अवसर पर ब्याहुत कलवार सेवा समिति के अध्यक्ष एवं भूतपूर्व सैनिक विश्वनाथ भगत ने अश्विनी कुमार चौबे को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, रामायण और बलभद्र माला भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान अभिषेक भगत, पवन भगत और अंकित भगत ने संयुक्त रूप से किया।
वहीं, पंजाब से आए भामाशाह जगदीश प्रसाद फगवाड़ा तथा रिसड़ा से आए पटेल भगत को भी अश्विनी कुमार चौबे ने अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान सेवा, सहयोग और सामाजिक सहभागिता की भावना को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
भारत को विश्व गुरु बनाने का आह्वान
अपने संक्षिप्त आशीर्वचन में अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए। उन्होंने सेवा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकजुटता को देश की मजबूती का आधार बताया।
कार्यक्रम के अंत में समिति के सचिव तारकेश्वर भगत ने उपस्थित अतिथियों, कांवरियों, सहयोगियों और पूरी आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
कटोरिया/कावरिया पथ में आयोजित इस 20वें निःशुल्क कांवरिया सेवा शिविर में एक ओर जहां वर्षों से चली आ रही सेवा परंपरा दिखाई दी, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का स्वयं कांवरियों की सेवा में शामिल होना कार्यक्रम का सबसे खास पहलू बन गया। मंच से संदेश देने के बजाय सेवा के बीच उतरकर उसका हिस्सा बनना ही इस आयोजन की वह तस्वीर रही, जिसकी चर्चा लोगों के बीच लंबे समय तक होती रहेगी।


