पाकुड़। गणपति उत्सव केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, उल्लास और अपनत्व का ऐसा अवसर है, जहां कुछ दिनों के लिए पूरा मोहल्ला एक परिवार की तरह नजर आने लगता है। पाकुड़ के छोटी अलीगंज वार्ड नंबर-3 में भी गणेश महोत्सव के दौरान कुछ ऐसा ही भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण देखने को मिला। उत्सव के अंतिम दिन मटका फोड़ कार्यक्रम के बाद जब विघ्नहर्ता गणपति को विसर्जन के लिए विदा किया गया, तो खुशी के बीच विदाई का भाव भी श्रद्धालुओं की आंखों में उतर आया।
मटका फूटा तो जयकारों से गूंज उठा मोहल्ला
विसर्जन से पहले आयोजित मटका फोड़ कार्यक्रम ने पूरे माहौल में उत्साह भर दिया। भक्तों में आयोजन को लेकर खासा जोश देखने को मिला। मटके को फोड़ने के प्रयास के दौरान युवाओं और श्रद्धालुओं के उत्साह ने वातावरण को जीवंत कर दिया।
मटका फूटते ही चारों ओर ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंज उठे। ऐसा लगा मानो गलियों में केवल आवाज नहीं, बल्कि श्रद्धा की लहर दौड़ गई हो।
गुलाल के रंग में रंगी आस्था
मटका फोड़ के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गणपति उत्सव की खुशी मनाते नजर आए। गाजे-बाजे के बीच गुलाल की उड़ती रंगीन फुहारों ने पूरे वातावरण को उत्सव के रंग में रंग दिया।
भक्तों के चेहरे पर खुशी थी, कदमों में उत्साह था और मन में बप्पा के प्रति अटूट श्रद्धा। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ श्रद्धालु गणपति की प्रतिमा को विसर्जन के लिए लेकर निकले।
जयकारों के बीच निकली बप्पा की विदाई यात्रा
गाजे-बाजे और भक्तिमय जयकारों के बीच भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान मोहल्ले के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस विदाई यात्रा का हिस्सा बने।
रास्ते भर गणपति के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। हर कोई अपने आराध्य को अंतिम विदाई देने के साथ अगले वर्ष फिर उसी उल्लास और श्रद्धा के साथ उनके आगमन की कामना करता नजर आया।
उत्सव में मुस्कान थी, विदाई में आंखें नम
गणपति उत्सव की सबसे खूबसूरत अनुभूति शायद यही है कि जिस प्रतिमा के सामने भक्तों ने इतने दिनों तक पूजा की, आरती की और अपनी मनोकामनाएं रखीं, उसी बप्पा को विदाई देते समय मन भावुक हो उठता है।
छोटी अलीगंज में भी विसर्जन के दौरान यही भाव देखने को मिला। चेहरे पर उत्सव की खुशी थी, लेकिन आंखों में बिछड़ने की नमी भी झलक रही थी। भक्तों के लिए यह केवल प्रतिमा की विदाई नहीं, बल्कि अपने घर आए प्रिय अतिथि को विदा करने जैसा भावुक क्षण था।
आना और जाना जीवन की शाश्वत गति है। गणपति का आगमन जहां आस्था और आनंद का संदेश देता है, वहीं विसर्जन यह स्मरण कराता है कि संसार में कोई भी ठहराव स्थायी नहीं। जो आया है, उसे एक दिन लौटना है—और इसी लौटने की आशा में विदाई भी प्रार्थना बन जाती है।
अगले बरस फिर आने की कामना
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा से अगले वर्ष फिर धूमधाम से आने की प्रार्थना की। भक्तिमय वातावरण के बीच बप्पा को खुशी-खुशी भावभीनी विदाई दी गई।
छोटी अलीगंज की गलियों में देर तक ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंजते रहे। गुलाल के रंग धीरे-धीरे थम गए, गाजे-बाजे की धुन भी शांत हो गई, लेकिन लोगों के मन में गणपति उत्सव की स्मृतियां और अगले वर्ष बप्पा के फिर आने की प्रतीक्षा छोड़ गईं।
कहते हैं, भक्ति में मिलन जितना सुंदर होता है, विदाई उतनी ही भावुक। छोटी अलीगंज में गणपति की विदाई भी इसी प्रेम, आस्था और विश्वास की कहानी कह गई—कि बप्पा भले ही विसर्जित हो गए, लेकिन भक्तों के हृदय में उनकी उपस्थिति हमेशा बनी रहेगी।
गणपति बप्पा मोरया… अगले बरस तू जल्दी आ।


